Journaling kya hai – जानिए 9 अद्भुत फायदे।

नमस्ते दोस्तों ! क्या आपने कभी सोचा है कि काश हमारे पास ऐसा मित्र हो जो हमारी हर बात सुने, किसी से शेयर ना करें, हमें कभी judge ना करें और हर पल हमें समझे ? दरअसल, ऐसा मित्र हमारे पास पहले से ही मौजूद हैं- और वह है हमारी डायरी। जब हम अपनी भावनाएँ, विचार और अनुभव डायरी में लिखते हैं, तो यह हमें एक सच्चे दोस्त की तरह साथ देती है। यही प्रक्रिया जर्नलिंग कहलाती है।

आपने कई सफल लोगों को यह कहते सुना होगा कि वे रोज अपने लक्ष्यों(goals), दिन भर के अनुभव और विचार डायरी में लिखते हैं। ऐसा करने से उन्हें अपने दिन और जीवन में स्पष्टता(Clarity) मिलती है, और अपने सपनों को पूरा करने की राह भी आसान हो जाती है। तो आज हम विस्तार से समझेंगे कि Journaling kya hai, इसके फायदे क्या हैं और इसे शुरू कैसे करें।

Journaling kya hai

Journaling kya hai?

जर्नलिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें हम एक डायरी का इस्तेमाल करते हैं और उसमें अपनी भावनाएँ, विचार, अनुभव, योजनाएँ और दिनभर की दिनचर्या लिखते हैं। इसमें हम यह दर्ज करते हैं कि पूरे दिन में हमने क्या किया, किन समस्याओं का सामना किया, कौन-सी बातें हमें खुशी दे गई और हमारे जीवन में कौन से पल यादगार बने।

जर्नलिंग केवल दिनचर्या लिखना भर नहीं है, बल्कि इससे हम अपने जीवन के लक्ष्य, आई हुई चुनौतियाँ और उनसे मिली सीख भी लिखते हैं।  अगर हमने किसी व्यक्ति से प्रेरणा ली हो या कोई नहीं समझ हासिल की हो, तो वह भी हम अपनी डायरी में दर्ज कर सकते हैं। यह प्रक्रिया जर्नलिंग कहलाती है।

जर्नलिंग कैसे शुरू करें?

जर्नलिंग शुरू करने के लिए सबसे पहले आपके पास एक सुंदर डायरी और तीन पेन होनी चाहिए। आप अपनी डायरी को सजाकर आकर्षक बना सकते हैं, क्योंकि जब डायरी आकर्षक होती है तो उसमें लिखने का मन और भी ज्यादा करता है। यह आपको अपनी ओर खींचती है और आपकी वाइब्रेशन को भी ऊँचा करती है।

आपके पास तीन पेन होने चाहिए – ब्लैक/ब्लू, ग्रीन और रेड।

ब्लैक या ब्लू पेन से आप अपनी सामान्य दिनचर्या और दिनभर में किए गए काम लिख सकते हैं।

ग्रीन पेन से आप वे बातें लिखे जो प्रेरणादायक हों, आपने दिनभर में जो अच्छी बातें सीखी हों या जिनसे आपको सकारात्मक ऊर्जा मिली हो।

रेड पेन से वे बातें लिखिए जिन्हें आप अपने जीवन से मिटाना चाहते हैं, जैसे बुरी आदतें या नकारात्मक विचार।

रोज जर्नल में क्या लिखें?

पूरे दिन की दिनचर्या।

अपने लक्ष्य और सपनें।

कोई ऐसा विचार या अनुभव जिसने गहरा असर डाला हों।

किसी बात से मिला प्रेरणादायक विचार।

दिन भर में आपके साथ हुई अच्छी और बुरी घटनाएँ।

यात्राओं की यादें और अनुभव।

अपनी योजनाएँ और आदतें (चाहे अच्छी हो या बुरी)।

अपनी परेशानियाँ और उनके संभावित समाधान।

अपनी खासियतें और वह बातें जो आपको रोज़ प्रेरित करती है।

भविष्य में 2 महीने 6 महीने में आप खुद को कहाँ देखना चाहते हैं।

इन सब प्रश्नों के उत्तर लिखकर आप अपनी डायरी को नियमित रूप से मेंटेन कर सकते हैं। यह Journaling की एक असली खूबसूरती है।

Journaling kya hai

जर्नल करने का सबसे अच्छा समय कौन सा है ?

Journaling करने का कोई निश्चित समय नहीं है, आप इसे कभी भी कर सकते हैं। फिर भी, कुछ समय विशेष रूप से लाभदायक माने जाते हैं:

सुबह का समय – अगर आप अपने दिन की योजना बनाना चाहते हैं, तो सुबह Journaling करना सबसे अच्छा होता है। इससे आपका पूरा दिन फॉक्सड और व्यवस्थित बनता है।

रात का समय – यदि आप दिनभर की अच्छी-बुरी घटनाएँ, अनुभव और दिनचर्या लिखना चाहते हैं, तो आप रात का समय सबसे उपयुक्त है। इससे आप पूरे दिन का आत्ममंथन कर पाते हैं।

कभी भी – अगर आपके मन में कोई समस्या, विचार, आइडिया या अनुभव आता है, तो आप उसे डायरी में कभी भी लिख सकते हैं। Journaling का सबसे बड़ा फायदा यही है कि यहां किसी बंधन में नहीं बंधा है।

एक बात हमेशा ध्यान रखें:

अगर आप सुबह Journaling करते हैं, तो अपनी डायरी को बेड के पास रखें ताकि वह आसानी से दिख जाए और आप लिखना ना भूलें।

अपनी डायरी को हमेशा सुरक्षित रखें, इसे दूसरों से छुपा कर रखें और किसी के साथ साझा ना करें, क्योंकि यह आपके मन की गहराइयों और व्यक्तिगत अनुभवों का संग्रह है।

जर्नलिंग के क्या लाभ है – Journaling benefits

कई दार्शनिक और विचारक Journaling को एक आध्यात्मिक हथियार(Spiritual weapon) मानते हैं।  यह आत्मचिंतन और आत्मज्ञान की सबसे प्रभावी वीधियों में से एक है। इसके अनेक लाभ है:

1. कंफ्यूजन दूर करना-

जर्नलिंग आपके मन में उठने वाले संदेहों और उलझनों को स्पष्ट करने में मदद करती है।

2. डिफिकल्टी पर काबू पाना-

जब आप अपनी परेशानियों को लिखते हैं, तो उनका हल खोजना आसान हो जाता है।

3. अनचाहे विचारों पर नियंत्रण-

यह मन के अनावश्यक और नकारात्मक विचारों को शांत करने में सहायक है।

4. दिन का रिव्यू और प्लानिंग-

आप बीते दिन का विश्लेषण कर सकते हैं और अगले दिन की बेहतर तैयारी कर सकते हैं।

5. स्वयं से प्रश्न पूछना-

Journaling आपके जीवन से जुड़े सवालों के उत्तर खोजने में मदद करती है, जैसे:

मैं अपनी जिंदगी के किस मोड़ पर खड़ा हूँ ?

ऐसा कौन-सा छोटा कदम है जो आज उठाकर कल बड़े परिणाम देगा ?

मुझे किस चीज़ के लिए आभारी होना चाहिए ?

6. दिल और दिमाग हल्का करना-

यह आपके विचारों और भावनाओं को कागज़ पर उतारकर मन को शांत करता है।

7. समस्या समाधान-

जर्नलिंग एक समस्या सुलझाने वाला साधन है, जिससे आप अपने जीवन को गहराई से समझ सकते हैं।

8. सेल्फ अवेयरनेस और पॉजिटिविटी-

यह आत्म जागरूकता बढ़ाती है, तनाव कम करती है और आपको सकारात्मक सोच की ओर ले जाती है।

9. कोई लिमिटेशन नहीं –

Journaling की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें कोई नियम या सीमा नहीं होती। आप अपने मन की कोई भी बात इसमें लिख सकते हैं।

Journaling kya hai

जर्नलिंग के प्रकार

• ग्रेटीट्यूड जर्नलिंग-

इसमें आप उन सभी चीजों को लिखते हैं जिनके लिए आप आभारी है। यह आपके पास जो भी है, उसके प्रति धन्यवाद व्यक्त करने का एक तरीका है। आप चाहे तो रोज़ अपनी डायरी में 10 ऐसी चीज़े लिख सकते हैं जिनके लिए आप कृतज्ञ महसूस करते हैं।

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• गोल्स जर्नलिंग-

इसमें आप अपने भविष्य के सभी लक्ष्यों और सपनों को लिखते हैं। यह आपको अपने उद्देश्यों को स्पष्ट करने और उन्हें पाने की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करता है।

• दिनचर्या जर्नलिंग –

इसमें आप अपने पूरे दिन का विश्लेषण करते हैं। आपने दिन भर में क्या किया, कौन-सी बातें अच्छी लगी, किस चीज ने आपको प्रभावित किया – यह सब आप इस Journaling में लिख सकते हैं।

• प्लानिंग जर्नलिंग-

इसमें आप अपने आने वाले दिनों, महीनों या वर्षों की योजनाएँ लिखते हैं। आप किन कामों को पूरा करना चाहते हैं, किन विचारों को लागू करना चाहते है और आपके पास कौन सी चुनौतियाँ या अवसर है, यह सब इसमें दर्ज किया जाता है।

• सेल्फ एनालिसिस जर्नलिंग-

इसमें आप खुद के बारे में लिखते हैं- आपकी आदतें  (अच्छी और बुरी), आपके विचार, आपके जीवन की स्थिति और आप क्या हासिल करना चाहते हैं। यह आत्म विश्लेषण का एक बेहतरीन तरीका है, जिससे आप खुद को और अच्छी तरह समझ पाते हैं।

• प्रॉब्लम जर्नलिंग-

इस प्रकार की Journaling में आप केवल अपनी समस्याएं लिखते हैं और उनका समाधान खोजने का प्रयास करते हैं। यह आपको अपनी कठिनाइयों और को स्पष्ट रूप से समझने और उनसे बाहर निकलने का रास्ता ढूंढने में मदद करती है।

लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन के लिए जर्नलिंग कैसे करें ?

Law of attraction की सबसे शक्तिशाली तकनीकों में से एक है जर्नलिंग या स्क्रिप्टिंग। इस तकनीक में आप अपनी डायरी में अपने भविष्य को ऐसे लिखते हैं जैसे वह पहले से ही सच हो चुका है।

उदाहरण के लिए, मान लीजिए आप एक बिजनेस शुरू करना चाहते हैं। तो अपनी डायरी में पूरी कहानी लिखिए-

आपने अपना बिजनेस कैसे शुरू किया।

लोग आपकी सफलता देखकर कैसे खुश हो रहे हैं।

आपके परिवार और दोस्तों की प्रतिक्रिया क्या है।

आपकी उपलब्धि को लेकर लोग क्या कहते हैं।

आपको अंदर से कैसी खुशी और संतुष्टि महसूस हो रही है।

जब आप इस तरह से अपने सपनों को विस्तार से लिखते हैं, तो आप न केवल उन्हें विजुलाइज करते हैं बल्कि ब्रह्मांड को यह स्पष्ट संदेश भी भेजते हैं कि आप जीवन में क्या पाना चाहते हैं।

इस तकनीक के लाभ:

क्रिएटिव विजुलाइजेशन के जरिए आप अपने लक्ष्यों को और स्पष्ट महसूस करते हैं।

यह आपकी सोच और वाइब्रेशन को उस दिशा में ले जाती है, जिससे आकर्षण की शक्ति(law of attraction)सक्रिय हो जाती है।

लिखते समय आप अपने भीतर विश्वास पैदा करते हैं कि आप अपने सपनों को पाने क के लिए पूरी तरह तैयार है।

जब आप अंत में कृतज्ञता व्यक्त करते हैं तो आपकी ऊर्जा और भी शक्तिशाली बन जाती है और चीजे आपके पास तेजी से आकर्षित होने लगती है।

इसलिए इसे जर्नलिंग तकनीक या स्क्रिप्टिंग तकनीक भी कहा जाता है। इसमें आप अपने सपनों को शब्दों में ढालकर उन्हें पहले अपने मन और फिर वास्तविकता में अस्तित्व देते है।

Journaling kya hai

निष्कर्ष-

Journaling kya hai ? यह केवल लिखने की आदत नहीं, बल्कि एक गहरी आत्म-यात्रा है जिसमें हम अपने विचारों और भावनाओं को शब्दों में ढालते हैं। जर्नलिंग के दो रूप होते हैं – नॉर्मल वर्जन, जिसमें हम अपनी दिनचर्या, कृतज्ञता या अच्छे समय के अनुभव लिखते हैं, और स्मार्टर वर्जन, जिसमें हम किसी समस्या, गोल प्लानिंग या प्रश्न का उत्तर खोजते हुए अपने भीतर छिपे समाधान को उजागर करते हैं।

इस प्रकार Journaling हमें न केवल स्पष्टता और आत्म- अभिव्यक्ति का अवसर देती है, बल्कि जीवन की चुनौतियों से बाहर निकालने और सही दिशा पाने का साधन भी बनती है। यही कारण है कि इसे अपने जीवन में अपनाना एक सकारात्मक और परिवर्तनकारी कदम है।

FAQ-

प्रश्न 1. क्या 12 साल के बच्चे को डायरी रखना चाहिए ?

उत्तर. डायरी लिखने के लिए कोई निश्चित आयु नहीं है, इसे हर कोई लिख सकता है।

प्रश्न 2. मैं जर्नलिंग कहां से शुरू कर सकता हूं ?

उत्तर. जर्नलिंग की शुरुआत आप अपनी दिनचर्या से कर सकते है।

प्रश्न 3. क्या जर्नल में दोनों को छोड़ना ठीक है ?

उत्तर. हाँ, आप कुछ दिनों तक या कुछ हफ्तों तक भी जर्नलिंग को छोड़ सकते हैं और फिर से कंटिन्यू भी कर सकते हैं।

प्रश्न 4. क्या ओवरथिंकर्स के लिए जर्नलिंग खराब है ?

उत्तर. बिल्कुल नहीं, बल्कि यह उनके लिए बहुत ही फायदेमंद है क्योंकि जब वह अपने विचार अपनी जर्नल में लिखते हैं तो इससे उनको क्लेरिटी आती है और उन्हें उनकी समस्या का हाल मिलने लगता है।

प्रश्न 5. लोग जर्नलिंग से क्यों बचते हैं ?

उत्तर. क्योंकि जर्नलिंग में लोग अक्सर खुद के बारे में लिखते हैं और जब उन्हें उनकी कमियाँ पता चलती है तो उन्हें बुरा लगता है और वह सच को मनाना नहीं चाहते हैं, सच का सामना नहीं करना चाहते है, तो यह एक कारण हो सकता है कि लोग जर्नलिंग से बचते हैं।

हमें विश्वास है कि, इस आर्टिकल के माध्यम से आपको समझ आया होगा कि Journaling kya hai और कैसे इसे अपने जीवन में शुरू करें, धन्यवद।

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