नियत ही नियति तय करती है। खराब नियत के 3 प्रभाव।

नमस्ते दोस्तों ! आज हम एक ऐसे अर्थपूर्ण विषय पर बात करने जा रहे हैं जो हमारे भाग्य को बदलने में मदद करता है – नियतयह एक ऐसी शक्ति है जो हमारे विचारों, शब्दों और कार्यों के माध्यम से हमारे जीवन की दिशा को तय करती है। नियत ही नियति तय करती है, और यह हमारे भाग्य को चमकाने में मदद करती है। यदि आपकी नियत साफ और अच्छी है, तो आपका भाग्य भी अच्छा होगा। लेकिन यदि आपकी नियत खराब है, तो आपका भाग्य भी खराब होगा। आइए जानते हैं कि नियत और नियति क्या है और कैसे नियत ही नियति तय करती है।

Niyati

नियत क्या है- what is intention?

नियत एक ऐसी मानसिक स्थिति है जो हमारे शब्दों,  विचारों, और उद्देश्यों द्वारा निर्धारित होती है। यह हमारे जीवन की दिशा को तय करती है और हमारे भविष्य को आकार देती है। जब हमारे शब्द, विचार, और भावनाएं अच्छी और सकारात्मक होती है, तो हमारी नियत भी अच्छी और सकारात्मक होती है। लेकिन जब यह खराब और नकारात्मक होती है, तो हमारी नियत भी खराब और नकारात्मक होती है।

सच्ची नियत का अर्थ है किसी भी काम को पूरे समर्पण के साथ करना, बिना अपने हित को देखें। यह एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसमें हम अपने काम को अपने जीवन के उद्देश्य के रूप में देखते हैं, न कि केवल अपने स्वार्थ के लिए। हमारी नियत ही हमारा भविष्य तय करती है, और मनुष्य का स्वभाव ही उसका भविष्य बनाता है। इसलिए, यह बहुत ही महत्वपूर्ण है कि हम अपनी नियत को साफ और सकारात्मक रखें, ताकि हम अपने जीवन को सफल और खुशहाल बना सके।

नियति क्या है- Destiny meaning in hindi

भाग्य यानि कि नियति हमारे जीवन की दिशा को तय करने वाली एक शक्ति है। यह हमारे दिन-प्रतिदिन के विचारों, शब्दों और कार्यों द्वारा निर्धारित होती है। हमारे कर्म, विचार और उद्देश्य हमारे भाग्य को आकार देते हैं। यदि हमारे विचार, शब्द और कार्य अच्छे और सकारात्मक है, तो हमारा भाग्य भी अच्छा और सकारात्मक होगा। लेकिन यदि हमारे विचार, शब्द और कार्य खराब और नकारात्मक है, तो हमारा भाग्य भी खराब और नकारात्मक होगा।

याद रखिए, आपका भाग्य ही आपके जीवन को रचने में मदद करता है। आप अपने भाग्य द्वारा अपने जीवन को रच सकते हैं और एक अच्छे जीवन की रचना कर सकते हैं।

नियत और नियति में अंतर-

नियत और नियति दोनों शब्द हमारे जीवन को आकार देने वाली शक्तियों को दर्शाते हैं, लेकिन इनमें एक महत्वपूर्ण अंतर है। नियत हमारे वश में होती है, जो हमारे विचारों, शब्दों और कार्यों द्वारा निर्धारित की गई एक मानसिक स्थिति है। हम अपनी नियत को बदल सकते हैं अपने विचारों, शब्दों और कार्यों को बदलकर।

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लेकिन नियति हमारे वश में नहीं होती है, यह हमारे कर्मों और उद्देश्यों द्वारा निर्धारित होती है। यदि हमारी नियत अच्छी है, तो हम अपने जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना कर सकते हैं और अपने भाग्य को बदल सकते हैं। लेकिन यदि हमारी नियत खराब है, तो हम अपने अच्छे समय को भी खराब कर सकते हैं। हमारी नियति हमारे जीवन में होने वाली घटनाओं और परिस्थितियों को प्रभावित करती है, क्योंकि यह हमारे कर्मों और उद्देश्यों द्वारा निर्धारित होती है। इसलिए, यह बहुत ही महत्वपूर्ण है कि हम अपनी नियत को अच्छी और सकारात्मक रखें और अपने कर्मों और उद्देश्यों को भी अच्छा और सकारात्मक बनाए, ताकि हम अपने जीवन को सफल बना सके।

तो चलिए अब जानते हैं कि कैसे नियत ही नियति तय करती है।

नियत ही नियति तय करती है-

नियत ही नियति तय करती है, भाग्य कितना सुंदर शब्द है, लेकिन यह उतना ही रहस्यमय भी है। लोग कहते हैं कि भाग्य में जो लिखा है उससे ज्यादा भी नहीं मिलता है और उससे कम भी नहीं मिलता है। नियति की जो लिखी है वह कभी मिटती नहीं है, किंतु यह कोई नहीं समझता की नियत ही आपकी नियति को बदलती है। यदि आप शुभ विचार रखेंगे, शुभ कर्म करेंगे तो नियति आपके साथ अशुभ होने ही नहीं देगी। आपका भाग्य कोई लिखी हुई नियति नहीं है, आपकी नियत ही नियति तय करती है, आपके अच्छे कर्मों द्वारा, आपके अच्छे उद्देश्यों द्वारा, आपकी अच्छी भावनाओं द्वारा।

अब हम कुछ उदाहरण द्वारा देखते हैं कि कैसे नियत ही नियति तय करती है-

1. मान ले कि आपके पास बहुत सारा धन है, और आप उसका उपयोग समाज सेवा में या लोगों की मदद करने में करते हैं। ऐसा करने से आपके अच्छे कर्म आपकी नियति को अच्छा बनाते हैं, और आपका जीवन ओर भी समृद्ध और खुशहाल होता है। लेकिन यदि आपके पास बहुत सारा धन है, और आप उसका उपयोग गलत तरीके से कर रहे हैं, लोगों की इज्जत नहीं करते हैं, तो आप अपनी नियति को खराब कर लेते हैं। ऐसा करने से आपका जीवन और भी कठिन और दुखद होता है।

इस प्रकार, हमारी नियत हमारी नियति को तय करती है, और हमारे अच्छे या बुरे कर्म हमारी नियति को अच्छा या बुरा बनाते हैं।

2. मान ले कि आपके पड़ोस में आपके पड़ोसी ने एक नई कार खरीदी है। अब आपकी उनके प्रति क्या भावना है ? क्या आप उन्हें देखकर खुश हैं या दुःखी हैं ? अगर आपको अच्छा लगता है कि वाह, इन्होंने कार खरीदी है, तो आप उन्हें बधाइयाँ देते हैं और उनकी प्रगति को देखकर खुश होते हैं। इससे आपकी नियत साफ होती है और आपको खुशी होती है।

लेकिन अगर आपकी भावना विपरीत है, तो आप उनकी कार को देखकर जलन महसूस करते हैं और सोचते हैं कि उनके पास कार आ गई, हमारे पास नहीं। इससे आपकी नियत साफ नहीं होती है और आपकी प्रगति रुकने लगती है। आपका भाग्य खराब होने लगता है और आप अपने लिए प्रगति के मार्ग बंद करने लगते हैं। लेकिन अगर आपकी नियत साफ है, तो आप अपने लिए प्रगति के मार्ग खोलते हैं और अपना भाग्य स्वयं बनाते हैं। इस प्रकार, आपकी नियत ही आपकी नियति तय करती है।

नियत ही नियति तय करती है

खराब नियत रखने से क्या हो सकता है?

1. मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव-

खराब नियत के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जैसे कि तनाव, चिंता और अवसाद।

2. परिवार पर प्रभाव-

खराब नियत के कारण परिवार के संबंधों में खराबी आती है। जैसे कि संबंधों में तनाव, विवाद और अलगाव।

3. प्रगति में बाधा-

खराब नियत के कारण प्रगति में बाधा आती है। जैसे कि जीवन में आगे बढ़ने में कठिनाई, लक्ष्यों को प्राप्त करने में असफलता और आत्मविश्वास में कमी।

क्या नियति को कर्म से बदला जा सकता है?

हाँ, कर्म से नियति को बदला जा सकता है। यदि आपके कर्म अच्छे हैं और आप सकारात्मक दिशा में काम करते हैं, तो आपका भाग्य भी बदल सकता है। अच्छे कर्मों के द्वारा आप अपने जीवन को एक नई दिशा में ले जा सकते है और अपने लिए एक अच्छा भविष्य बना सकते हैं।

कर्म द्वारा नियति को बदलने की अवधारणा यह है कि हमारे कर्म हमारे भविष्य को आकार देते हैं। यदि हम अच्छे कर्म करते हैं और सकारात्मक दिशा में काम करते हैं, तो हम अपने भाग्य को बदल सकते हैं और अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं।

Niyati

क्या हमारी नियति निश्चित है?

नहीं, हमारी नियति निश्चित नहीं है। हम अपने भाग्य का निर्माण स्वयं कर सकते हैं। हमारे अच्छे कर्म, अच्छे विचार, और ईमानदारी से हमारी नियति तय होती है। यदि हम अभी अच्छे कर्म करते हैं और सकारात्मक दिशा में काम करते हैं, तो हम अपनी नियति को बदल सकते हैं।

इंसान की नियत साफ हो तो काम कैसे अच्छे होते हैं?

अगर किसी व्यक्ति की नियत साफ है, तो नियति उसका हमेशा साथ देती है। इसका कारण यह है कि जब किसी इंसान की नियत अच्छी होती है, तो वह अच्छे कर्म करता है, और कर्म के आधार पर ही हमारी नियति यानि कि भाग्य तय होता है। अगर हमने अच्छे कर्म किए हैं, तो हमारा भाग्य अच्छा ही होगा और हमारे भाग्य में अच्छा लिखा होगा, जिसके कारण हम जो भी काम करेंगे, वह अच्छे होंगे और उस काम में हम सफल होते जाएंगे।

Niyati

Niyati quotes-

  • “गीता में लिखा है अगर तुम्हारी नियत साफ है न, तो गलत रास्ते भी तुम्हें तुम्हारी मंजिल की तरफ ले जाएंगे।”
  • “नियति भी उसी के साथ होती है, जिसकी नियत साफ होती है, क्योंकि बुरे इंसान का इलाज है, दोस्तों बुरी नियत का नहीं है।”
  • “नियति व्यक्ति को हर समस्या से निकलने के लिए विकल्प अवश्य देती है।
  • “आपकी अच्छी नियत से ईश्वर प्रसन्न होते हैं, और दिखावे से इंसान, यह आप पर निर्भर करता है, आप किसे प्रसन्न करना चाहते हैं।”

निष्कर्ष-

जैसा कि हमने जाना है, नियत ही नियति तय करती है। हमारे जीवन को बेहतरीन बनाने में हमारी नियत सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि आपकी नियत अच्छी और साफ है, तो आप अपने लिए नए जीवन की रचना करते हैं और सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं। लेकिन यदि आपकी नियत खराब है, तो आप अपनी बनी हुई नियति को भी बिगाड़ लेते हैं और जीवन में अपनी प्रगति को रोक लेते हैं। इसलिए, अपनी नियत साफ रखें और अपने लिए सफलता के मार्ग खोले अच्छी नियत के साथ आप अपने जीवन को बेहतरीन बना सकते हैं।

FAQ:

प्रश्न 1. क्या हम अपना भाग्य बदल सकते हैं ?

उत्तर.  हाँ, हम अपना भाग्य बदल सकते हैं। हमारी नियत और हमारे कर्म हमारे भाग्य को तय करते हैं। यदि हम अपनी नियत को साफ रखें और अच्छे कर्म करें, तो हम अपने भाग्य को सकारात्मक दिशा में बदल सकते हैं।

प्रश्न 2. कैसे हम अपनी नियत को साफ रख सकते हैं ?

उत्तर.  अच्छे विचारों और कर्मों का पालन करके,  हम अपनी नियत को साफ रख सकते हैं।

प्रश्न 3. कर्म और भाग्य में कौन बड़ा है ?

उत्तर.  कर्म और भाग्य में कर्म बड़ा है क्योंकि हमारा भाग्य हमारे कर्मों द्वारा ही निर्धारित होता है।

प्रश्न 4. किस्मत का दूसरा नाम क्या है ?

उत्तर.  किस्मत का दूसरा नाम भाग्य, नियति या नसीब है।

प्रश्न 5. किस्मत कैसे साथ देती है ?

उत्तर. आपकी किस्मत, आपका साथ तभी देती है जब आपके पुराने कर्म या आप जो वर्तमान में कर्म कर रहे हो वह अच्छे हों।

हमें विश्वास है कि, इस आर्टिकल के माध्यम से आपको समझ आया होगा कि कैसे नियत ही नियति तय करती है, धन्यवाद।

 

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