माला जप के नियम : 9 बातें जो जप को सफल बनाती हैं

हरे कृष्णा दोस्तों,

हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।

हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे।

यह केवल एक साधारण मंत्र नहीं, बल्कि एक महामंत्र है, जो हमें भगवान कृष्ण से जोड़ता है।

यह मंत्र हमारे मन को शांति देता है, हृदय को आनंद से भर देता है और जीवन में सकारात्मकता लाता है। इस महामंत्र के जप से मन की चंचलता कम होती है और भक्ति का भाव जागृत होता है।

आप सभी ने कभी न कभी हरे कृष्ण मंत्र के जप, राधा नाम जप और माला जप के बारे में सुना ही होगा। यह भी सुना होगा कि इनका नियमित जप करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है और ईश्वर के प्रति हमारा प्रेम बढ़ता है।

लेकिन दोस्तों, क्या आप सच में माला जप के सही नियम और विधि जानते हैं? अगर नहीं, तो इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे की माला जप क्या होता है, माला जप के नियम क्या है, माला जप की विधि क्या है और इसे सही तरीके से कैसे किया जाता है।

माला जप के नियम

माला जप क्या है।What is Chanting?

माला जप का अर्थ है पवित्र माला – जैसे तुलसी या रुद्राक्ष की माला – के द्वारा भगवान के नाम और मंत्रों का मुख से बार-बार उच्चारण करना। जब हम “राधा-राधा”,  “कृष्ण के नाम”, “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”, “हरे कृष्ण महामंत्र” या “ॐ” का श्रद्धा और एकाग्रता के साथ जप करते हैं, तो इसे ही माला जप कहा जाता है। माला जप केवल शब्दों का उच्चारण नहीं है, बल्कि यह मन, बुद्धि और हृदय को भगवान से जोड़ने की एक आध्यात्मिक साधना है।

जानिए राधा नाम जाप कैसे करें

दोस्तों, यह जानकर आपको बहुत आनंद होगा कि प्राचीन युगों में भगवान की प्राप्ति के लिए ऋषि मुनि और संत कठोर तपस्या, लंबी साधना और कई जन्मों तक अभ्यास करते थे। उन्हें गहन तप और नियमों का पालन करना पड़ता था।

लेकिन कलयुग में ईश्वर ने हमारे लिए एक सरल और करुणामयी मार्ग दिया है – नाम जाप का मार्ग। केवल भगवान का नाम श्रद्धा और प्रेम से लेने मात्र से ही भगवान की प्राप्ति हो जाती है, मन शुद्ध होता है, भक्ति बढ़ती हैं और परम सुख की अनुभूति होती है। नियमित माला जप के द्वारा हम भगवान के समीप जा सकते हैं और अपने जीवन में शांति, आनंद और सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।

कौन सी माला किस भगवान के लिए होती है।Which Mala is for which God?

• यदि आप शिव या हनुमान जी का जप करते हैं, तो रुद्राक्ष की माला का उपयोग करें।

• यदि आप कृष्ण या विष्णु भगवान का जप करते हैं, तो तुलसी माला उपयुक्त मानी जाती है।

• और यदि आप लक्ष्मी माता का जप करते हैं तो स्फटिक माला का प्रयोग करें।

माला जप के नियम

माला जप के नियम क्या है।What are the rules of Jap Mala

दोस्तों, पहले हम माला जप के नियम जान लेते हैं,  फिर आगे समझेंगे की माला जप कैसे किया जाता है।

1. माला जप करने से पहले स्नान करें और स्वच्छ, पवित्र वस्त्र पहने।

2. जप भगवान के सामने या किसी शांत और पवित्र स्थान पर करें, जहाँ कोई भी व्यवधान न हो।

3. यदि आप कृष्ण भगवान का जप करते हैं, तो तुलसी माला का ही उपयोग करें।

4. माला हमेशा अपनी ही रखें। किसी और की माला का उपयोग न करें। और अपनी माला किसी और को न दे।

5. जप हमेशा आसन पर बैठकर करें। अपना आसान भी किसी और को ना दे और जप का स्थान स्वच्छ रखें।

6. माला को सुरक्षित रखने के लिए Chanting Bag (गोमुखी) का उपयोग करें और अनावश्यक रूप से दूसरों को ना दिखाएं।

7. जब करते समय किसी से बात न करें, बार-बार हिले नहीं और कमर सीधी रखें।

8. मन और ध्यान केवल नाम जप पर ही केंद्रित रखें।

9. यदि माल गिर जाए या जप बीच में टूट जाए, तो माला को श्रद्धा से आंखों से लगाकर पुनः जप प्रारंभ करें।

माला जाप कैसे करें।How to do Chanting?

माला जप के लिए एक माला की आवश्यकता होती है जिसमें 109 मनके होते हैं।

माला के बीच में जो एक मनका होता है, जहाँ धागा जुड़ा होता है, उसे सुमेरू कहा जाता है। जप करते समय सुमेरू को न छुए और नहीं उसे पार करें।

जप करते समय अंगूठे, माध्यमा (मिडिल फिंगर) और अनामिका (रिंग फिंगर) का उपयोग करें। तर्जनी (इंडेक्स फिंगर) और सबसे छोटी उंगली से माला को बिल्कुल न छुए।

माला को अनामिका उंगली पर रखे और अंगूठे व मध्यमा उंगली से मनको को अपनी और धीरे-धीरे फेरते हुए जाप करें।

माला जप करते समय माला नाभी के नीचे न लाएँ और न ही उसे पैरों से स्पर्श होने दें।

इसलिए माला को सुरक्षित और पवित्र रखने के लिए Chanting Bag (गोमुखी) का उपयोग करें।

माला जप कभी भी जल्दी-जल्दी में न करें। पूरा ध्यान मंत्र पर रखें। श्रद्धा और एकाग्रता से किया गया जप ही फलदायी होता है।

जप को बीच में न छोड़े। पूरी 1 माला एकाग्र होकर पूरी करें।

जब एक माला पूरी हो जाए, तो सुमेरू मनके को पार न करें। माला को घूमाकर दूसरी दिशा से पुनः जप आरंभ करें।

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माला जाप कितनी बार करना चाहिए।How many times should we jaap?

माला जप कितनी बार करना है, यह व्यक्ति की क्षमता और एकाग्रता पर निर्भर करता है। शुरुआत में एक माला से ही आरंभ करना सबसे अच्छा रहता है, क्योंकि प्रारंभ में मन जल्दी भटकता है। अगर बिना ध्यान लगाए जल्दी-जल्दी कई माला कर ली जाए, तो उसका पूरा लाभ नहीं मिलता।

इसलिए धैर्य रखें और नियमित अभ्यास करें। प्रारंभ में एक माला से शुरुआत करें, फिर धीरे-धीरे संख्या बढ़ाएँ। जैसे – यदि आज आप दो माला कर रहे हैं, तो एकादशी के दिन एक माला और बढ़ा सकते हैं। इस तरह अभ्यास के साथ जप की संख्या बढ़ाना अधिक प्रभावी और फलदायी होता है।

बिना माला जाप कैसे करें

यदि आपके पास माला न हो, तो भी आप नाम जप कर सकते हैं। इसके लिए आप डिजिटल काउंटर (जप काउंटर) का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा, अपने हाथों की उंगलियों पर गिनती करके भी बिना माला के जाप किया जा सकता है।

अगर आप गिनती में नहीं पड़ना चाहते, तो समय के अनुसार भी जाप कर सकते हैं – जैसे 5 मिनट, 10 मिनट या 15 मिनट तक एकाग्र होकर नाम जप करें। इस प्रकार बिना माला के भी श्रद्धा और ध्यान के साथ जप करना संभव है।

माला जपने का सही समय क्या है?

माला जप के लिए ब्रह्म मुहूर्त को सबसे शुभ माना जाता है। इसके अलावा सुबह का समय भी जप के लिए उत्तम होता है।  सुबह के समय वातावरण शांत होता है, इसलिए मन आसानी से एकाग्र हो जाता है।

यदि आप शाम को माला जप करना चाहते हैं, तो स्नान करके शुद्ध अवस्था में करें। फिर भी, साधना के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा और फलदायी माना जाता है।

माला जपने के बाद क्या करना चाहिए?

माला जप पूर्ण होने के बाद माला को श्रद्धा पूर्वक हाथ जोड़कर प्रणाम करें। इसके बाद माला को गोमुखी (चैंटिंग बैग) में सुरक्षित रखें और किसी स्वच्छ व पवित्र स्थान पर रखें, जहाँ गंदगी न हो। अंत में भगवान को प्रणाम करके शांत भाव से उठ जाएँ।

हरे कृष्ण मंत्र जाप कैसे करें।What are the Chanting rules for Hare Krishna Mantra?

हरे कृष्ण मंत्र का जाप शुरू करने से पहले, जब आप माला लेकर बैठे, तो पहले पंचतत्व मंत्र का उच्चारण करें। इसके बाद हरे कृष्ण महामंत्र का जाप आरंभ करें।

जब एक माला पूरी हो जाए, तो दूसरी माला शुरू करने से पहले फिर से पंचतत्व मंत्र का उच्चारण करें। इसी प्रकार जितनी भी माल करनी हो, हर माला शुरू करने से पहले पंचतत्व मंत्र बोलकर फिर हरे कृष्ण मंत्र का जाप करें।

माला जप के नियम

माला जाप करने का मंत्र।

माला जप में आप अपनी श्रद्धा और इष्टदेव के अनुसार नीचे दिए गए मंत्रों में से किसी एक का जप कर सकते हैं:

  • हरे कृष्ण महामंत्र
    “हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
    हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे।”

  • कृष्ण / विष्णु के लिए – “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”

  • शिव के लिए – “ॐ नमः शिवाय”

राम के लिए – “श्री राम जय राम जय जय राम” या “राम राम”

  • हनुमान के लिए – “राम नाम” या “ॐ हनुमते नमः”

  • लक्ष्मी के लिए – “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः”

निष्कर्ष

माला जप केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि मन को शुद्ध करने और भगवान से जुड़ने का एक सरल व प्रभावी मार्ग है। जब हम नियमों के साथ, शुद्धता और एकाग्रता से माला जप करते हैं, तभी उसका वास्तविक फल प्राप्त होता है। स्नान करके पवित्र अवस्था में बैठना, शांत स्थान चुनना, अपनी माला और आसन अलग रखना, माला को नाभि के नीचे या पैरों से ना लगाना, जल्दी-जल्दी जप न करना और पूरा ध्यान नाम जप पर रखना – यह सभी नियम हमारी साधना को और अधिक पवित्र बनाते हैं।

नियमित अभ्यास से मन स्थिर होता है और धीरे-धीरे भक्ति का भाव गहरा होने लगता है। सच्ची श्रद्धा और धैर्य के साथ किया गया जप हमें कृष्ण के नाम से जोड़ता है और जीवन में शांति,  आनंद और सकारात्मक परिवर्तन लाता है।

माला जप के नियम

FAQ:

प्रश्न 1. क्या हम बिस्तर पर मंत्र जाप कर सकते हैं?

उत्तर.  नहीं, आप बिस्तर पर मंत्र जाप नहीं कर सकते हैं अगर आपका स्वास्थ्य ठीक नहीं है। तब आप बिस्तर पर मंत्र जाप कर सकते हैं।

प्रश्न 2. गले में कौन सी माला पहननी चाहिए?

उत्तर. गले में तुलसी की माला पहननी चाहिए।

प्रश्न 3. एक माला में कितने मनके होते हैं?

उत्तर. एक माला में 108 मनके होते हैं इनके अतिरिक्त उसमें एक और मनका होता है – जिसे सुमेरु कहा जाता है।

प्रश्न4. क्या काउंटर से नाम जप कर सकते हैं?

उत्तर. प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं नाम जप के लिए काउंटर मशीन का उपयोग करने में कोई हानि नहीं है – क्योंकि नाम जप आपकी जुबान कर रही है न की काउंटर यह तो सिर्फ गिनती का माध्यम है।

हमें विश्वास है कि, इस आर्टिकल के माध्यम से आपको माला जप के नियम समझ आए होंगे, धन्यवाद।

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