मेरा दिल बहुत तेज धड़क रहा है। दिमाग जैसे काम करना बंद कर चुका है। बेचैनी इतनी है कि ध्यान इधर-उधर भटक रहा है और कुछ समझ नहीं आ रहा। पढ़ा हुआ भी याद नहीं आ रहा, जैसे दिमाग पूरी तरह चकरा गया हो।
यह आवाज किसी एक विद्यार्थी की नहीं है, बल्कि हर उस छात्र की है जो परीक्षा के समय इस दौर से गुजरता है। चाहे वह टॉपर हो या बैकबेंचर, एग्जाम आते ही मन में डर पैदा होना बहुत आम बात है। इसलिए अगर आप भी इस समय घबराहट, Anxiety या डर महसूस कर रहे हैं, तो समझ लीजिए – आप अकेले नहीं है।
परीक्षा का डर इतना हावी हो जाता है कि ना तो मन लगाकर पढ़ाई हो पाती है और नहीं दिमाग शांत रह पाता है। एसे में एक विद्यार्थी के सामने दो ही रास्ते होते हैं – या तो वह इस डर को समझ कर उससे बाहर निकल ले और अपना 100% दे, या फिर डर के आगे हार मानकर खुद को कमजोर महसूस करता रहे।
इसी वजह से आज हम इस लेख में विस्तार से समझेंगे की परीक्षा का डर क्या है, परीक्षा से डर क्यों लगता है और सबसे जरूरी – परीक्षा का डर कैसे दूर करें।

परीक्षा का डर क्या है।What is the fear of exams?
अगर हम परीक्षा के डर की बात करें, तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि डर वास्तव में परीक्षा का नहीं होता, बल्कि परीक्षा के बाद आने वाले परिणाम यानी रिजल्ट का होता है।
विद्यार्थी यह सोचकर घबराने लगता है कि पता नहीं परीक्षा में कैसे प्रश्न आएंगे, क्या वह अच्छे से लिख पाएगा या नहीं। परीक्षा हॉल में बैठते ही पसीना आने लगता है, दिल की धड़कन तेज हो जाती है और मन बेचैन हो उठता है।
कई छात्रों को परीक्षा से एक दिन पहले ही घबराहट शुरू हो जाती है। हड़बड़ी और तनाव के कारण दिमाग ठीक से काम नहीं करता। इतना बड़ा सिलेबस देखकर यह समझ नहीं आता कि क्या पढ़े और क्या छोड़े। इसी उलझन और अनिश्चितता की वजह से डर बढ़ता चला जाता है – कि मैं अच्छा कर पाऊंगा या नहीं, पास हो जाऊंगा या नहीं।
इसी मानसिक स्थिति को ही परीक्षा का डर कहा जाता है, जिसमें डर और तनाव पढ़ाई से ज्यादा परिणामों पर केंद्रित हो जाता है।
परीक्षा से डर क्यों लगता है।Why do we get exam fear?
1. सिलेबस ज्यादा होना और तैयारी कम होना
सच बात बोलू, तो अगर पूरे साल मस्ती की हो और पढ़ाई नाम की चीज ठीक से ना कि हो, तो परीक्षा के समय डर लगना बिल्कुल स्वाभाविक है। क्योंकि अंदर से हमें भी पता होता है कि अब आखरी वक्त में कितना ही पढ़ ले, पूरा सिलेबस कवर होना मुश्किल है।
परीक्षा नजदीक आते ही दिमाग में यही चलता रहता है – इतना सारा सिलेबस है, क्या-क्या पढ़ूँ और क्या छोड़ दूँ ? कुछ समझ नहीं आता और इसी उलझन में डर और घबराहट बढ़ती चली जाती है।
असल में जब सिलेबस बहुत बड़ा लगे और हमारी तैयारी कमजोर हो, तो मन अपने आप डर से भर जाता है। यही एक बड़ी वजह है कि विद्यार्थीयों को परीक्षा का डर सताने लगता है।

2. सब कुछ पढ़ने के बाद भी छूट जाने का डर
कई बार ऐसा भी होता है कि हमारी तैयारी अच्छी होती हैं। सारे सब्जेक्ट और ज्यादातर टॉपिक हमने कवर कर रखे होते हैं, फिर भी मन में एक डर बना रहता है। बार-बार यही ख्याल आता है कि कहीं परीक्षा में सिलेबस से बाहर का कुछ आ गया तो? कहीं मैंने कोई जरूरी टॉपिक छोड़ तो नहीं दिया?
यही ओवरथिंकिंग धीरे-धीरे डर में बदल जाती है। भले ही हमने पढ़ाई की हो, लेकिन खुद पर शक करने की वजह से परीक्षा का डर बना रहता है।
3. माता-पिता की उम्मीदों का दबाव
कई विद्यार्थियों को यह डर भी अंदर ही अंदर परेशान करता रहता है कि उनके माता-पिता उनसे बहुत ज्यादा अच्छे रिजल्ट की उम्मीद कर रहे हैं। मन मे बार-बार यही सवाल चलता रहता है – क्या मैं उनकी उम्मीदों पर खरा उतर पाऊंगा या नहीं?
साथ ही यह डर भी जुड़ा रहता है कि अगर रिजल्ट अच्छा नहीं आया तो माता-पिता क्या कहेंगे, लोग क्या बोलेंगे। इसी सोच में विद्यार्थी खुद पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाल लेता है और यही दबाव धीरे-धीरे परीक्षा के डर में बदल जाता है।
4. ओवरथिंकिंग की वजह से बढ़ता डर
कई बार परीक्षा का डर हमारी अपनी ओवरथिंकिंग की वजह से भी बढ़ जाता है। असल में परीक्षा इतनी मुश्किल नहीं, जितनी हम उसे सोच-सोच कर बना लेते हैं।
जब हम बार-बार परीक्षा और उसके परिणाम के बारे में सोचते रहते हैं, तो दिमाग में डर अपने आप बढ़ता चला जाता है। यही ज्यादा सोचना धीरे-धीरे घबराहट में बदल जाता है और परीक्षा का डर और गहरा हो जाता है।
5. खुद से ज्यादा उम्मीदें रखना
कई बार हम खुद से भी रिजल्ट को लेकर बहुत ज्यादा उम्मीदें लगा लेते हैं, लेकिन पढ़ाई उस लेवल तक नियमित रूप से नहीं हो पाती। अंदर से हमें भी एहसास होता है की मेहनत और उम्मीदों के बीच फर्क है।
यही अंतर मन में डर पैदा करता है – कि अगर रिजल्ट वैसा नहीं आया जैसा हमने सोचा था तो क्या होगा। इसी वजह से परीक्षा का डर और बढ़ने लगता है।
परीक्षा का डर कैसे दूर करें।how to overcome exam fear and anxiety
1. सही योजना बनाएं
देखिए, पढ़ाई का डर लगभग हर विद्यार्थी को होता है। अब आप यह समझ ही चुके हैं कि चाहे टॉपर हो या बैकबेंचर, परीक्षा के समय डर सभी को लगता है। लेकिन अब हमें डरने पर ध्यान नहीं देना है, बल्कि इस बात पर फोकस करना है कि जो समय बचा है, उसका सही इस्तेमाल कैसे किया जाए।
इसके लिए सबसे पहले एक सरल और साफ योजना बनाइए। यह सोचिए की कौन से टॉपिक आपको आसान लगते हैं, कौन सी चीजे आपको अभी ठीक से याद है।
क्योंकि समय कम है, इसलिए सब कुछ नए सिरे से पढ़ना संभव नहीं होता। ऐसे में जो आपको आता है, उन्हीं टॉपिक्स का अच्छे से रिवीजन कीजिए और उन विषयों पर ज्यादा ध्यान दीजिए जिनके परीक्षा में आने की संभावना होती है।
2. डीप ब्रीदिंग
जैसे-जैसे परीक्षा का समय पास आता है, दिल की धड़कन तेज होने लगती है और घबराहट बढ़ जाती है। ऐसे समय पर जब डर बहुत ज्यादा महसूस हो, तो 5 मिनट के लिए डीप ब्रीदिंग करना शुरू कीजिए।
गहरी सांस लेने से दिमाग धीरे-धीरे शांत होने लगता है और ध्यान एक जगह केंद्रित होता है। इससे घबराहट कम होती है और मन पढ़ाई या परीक्षा के लिए तैयार हो जाता है।
3. मोटिवेशनल वीडियो देखें
परीक्षा की तैयारी के दौरान या परीक्षा देने जाने से पहले कुछ मिनट मोटिवेशनल वीडियो देखने से मन को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और डर कम होने लगता है।
जब मन मोटिवेट रहता है, तो पढ़ाई पर ध्यान भी बेहतर लगता है और आप ज्यादा फोकस के साथ तैयारी कर पाते हैं।
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4. दोस्त से बात करें और साथ में पढ़ाई करें
कभी-कभी ऐसे दोस्त से बात करना भी राहत देता है, जिसने ज्यादा पढ़ाई नहीं की हो। इससे मन पर बना दबाव थोड़ा कम होता है और यह एहसास होता है कि आप अकेले नहीं है।
हाँ, यह ध्यान रखना जरूरी है की बात करने के बाद डर कम करके दोनों मिलकर पढ़ाई पर ध्यान दें। साथ बैठकर यह देखें कि किसे क्या आता है और कौन सी चीजे दोहरानी है।
इस तरह मिलकर पढ़ाई करने से डर कम होता है। और आत्मविश्वास बढ़ता है।

5. “जो होगा, देखा जाएगा” वाला माइंडसेट अपनाइए
जब परीक्षा बिल्कुल सामने हो और पेपर हाथ में आ चुका हो, तो डर को पकड़ कर बैठने का कोई फायदा नहीं होता है। एसे समय पर अपने दिमाग में बस यही रखें – “अब जो होगा, देखा जाएगा।”
इसका मतलब हार मनाना नहीं है, बल्कि डर को छोड़कर उस पर फोकस करना है जो आपके कंट्रोल में है। जो सवाल आते हैं, उन्हें बिना घबराए फटाफट करना शुरू करें। अब बाकी चीजे हमारे हाथ में नहीं होती, इसलिए खुद पर भरोसा रखें, भगवान पर विश्वास रखें और पूरे मन से आगे बढ़े।
क्या एग्जाम से डरना नॉर्मल है।Is it normal to be scared of exams?
हाँ, एग्जाम से डर लगना बिल्कुल सामान्य बात है। यह डर हर विद्यार्थी को होता है – चाहे वह नर्सरी में पढ़ने वाला बच्चा हो या किसी बड़े कॉम्पिटेटिव एक्जाम की तैयारी कर रहा हो स्टूडेंट।
फर्क नहीं पड़ता कि किसी ने बहुत ज्यादा पढ़ाई की है या बिल्कुल कम, परीक्षा से पहले थोड़ा डर महसूस होना हर किसी के साथ होता है। इसलिए अगर आपको भी एग्जाम से डर लग रहा है, तो इसे अपनी कमजोरी ना समझे – यह एक आम मानवीय भावना है।
परीक्षा में सफल होने के लिए क्या करना चाहिए।How to get success in exams?
परीक्षा में सफल होने के लिए सबसे जरूरी है कि आप पढ़ाई एक सुव्यवस्थित और नियोजित तरीके से करें। न तो बिना प्लान के अचानक बहुत ज्यादा पढ़ाई शुरू करें और ना हीं बिल्कुल पढ़ाई छोड़ दे।
इसके लिए समय प्रबंधन बहुत जरूरी है। अपने समय के अनुसार हर विषय को अलग-अलग समय दे और उसी हिसाब से पढ़ाई करें। साथ ही, समय-समय पर रिवीजन करना भी उतना ही जरूरी है। जो भी टॉपिक्स आपने पूरे हफ्ते पढ़े हो, उनका हफ्ते में कम से कम एक बार रिवीजन जरूर करें।
ध्यान रखें कि रोज सिर्फ एक ही विषय में ना उलझे। बेेहतर यह कि हर विषय को रोज थोड़ा-थोड़ा समय दे या फिर अपने अनुसार तय करें कि किन दिनों में किस विषय पर फोकस करना है। जब आप इस तरह धीरे-धीरे सही योजना के साथ पढ़ाई करते हैं, तो परीक्षा में सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
परीक्षा से पहले नसों को शांत कैसे करें।How to calm nerves before exam
परीक्षा से पहले घबराहट और तनाव महसूस होना आम बात है, लेकिन इसे शांत किया जा सकता है। इसके लिए सबसे असरदार तरीका है – मेडिटेशन। किसी शांत जगह पर आराम से बैठे, जहाँ कोई डिस्टरबेंस ना हो। धीरे-धीरे आंखें बंद करे और गहरी सांस लेना शुरू करें। अपना पूरा ध्यान बस अपनी सांसों पर रखे।
इसके बाद मन में सकारात्मक विचार लाएं और खुद को परीक्षा में सफल होते हुए देखे। कल्पना करें कि आपने परीक्षा अच्छे से पास कर ली है और आपका रिजल्ट आपकी उम्मीदों के अनुसार आया है। इस सफलता की खुशी को महसूस करें।
रोज 5-10 मिनट इस तरह सांसों पर ध्यान और सकारात्मक विजुलाइजेशन करने से दिमाग शांत होता है, नसों की घबराहट कम होती और परीक्षा का डर धीरे-धीरे खत्म होने लगता है।

निष्कर्ष – परीक्षा का डर कैसे दूर करें
परीक्षा का डर कोई कमजोरी नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि आप अपने भविष्य को लेकर गंभीर है। सही योजना, नियमित पढ़ाई, समय-समय पर रिवीजन और सकारात्मक सोच अपनाकर परीक्षा का डर कैसे दूर करें – इसका जवाब खुद-ब-खुद मिल जाता है। जब आप अपने मन को शांत रखते हैं, खुद पर भरोसा करते हैं और पुरी ईमानदारी से तैयारी करते हैं, तो डर धीरे-धीरे आत्मविश्वास में बदल जाता है।
याद रखें, परीक्षा सिर्फ आपकी मेहनत को परखने का एक माध्यम है, आपकी काबिलियत को नहीं। शांत मन और भरोसे के साथ किया गया हर प्रयास आपको सफलता के और करीब ले जाता है।
FAQ:
प्रश्न 1. मैं परीक्षा के दौरान तनाव कैसे कम कर सकता हूं?
उत्तर. परीक्षा के समय तनाव कम करने के लिए गहरी सांस लें, मन को शांत रखें और जो आता है उसी पर ध्यान दें। नकारात्मक सोच से बचें और खुद पर भरोसा रखें। याद रखें—शांत दिमाग से ही बेहतर प्रदर्शन होता है।
प्रश्न 2. क्या बोर्ड परीक्षा बहुत कठिन है?
उत्तर. बोर्ड परीक्षा उतनी कठिन नहीं होती जितना उसे बनाया जाता है। अक्सर स्कूल का माहौल और शिक्षकों की बातें इसे बहुत डरावना बना देती हैं, लेकिन वे ऐसा छात्रों को मेहनत के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से कहते हैं। सही तैयारी और समझ के साथ बोर्ड परीक्षा संभाली जा सकती है।
हमें विश्वास है कि इस आर्टिकल के माध्यम से आपको समझ आया होगा की परीक्षा का डर कैसे दूर करें, धन्यवाद।