प्रेमानंद जी महाराज कौन है 13 साल की उम्र में त्याग का निर्णय

राधे-राधे दोस्तों, संत वही होता है जो भक्तों के जीवन में प्रकाश भर देता है, जिन्हें देखकर मन स्वतः शांत हो जाता है और जिनके वचनों को सुनने मात्र से जीवन में आने वाले संघर्षों से लड़ने की शक्ति मिलती है। ऐसे ही दिव्य संतों में एक महान और पूज्य नाम है श्री प्रेमानंद जी महाराज। आज बहुत से लोगों के मन में यह जानने की जिज्ञासा रहती है कि प्रेमानंद जी महाराज कौन है, क्योंकि उन्होंने केवल भारत के लोगों के जीवन में ही नहीं, बल्कि भारत के बाहर भी असंख्य लोगों को आध्यात्म से जोड़कर उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन किया है।

श्री प्रेमानंद जी महाराज ने लोगों को जीवन जीने की सही कला सिखाई और भक्ति के सरल मार्ग से परिचित कराया। उन्होंने राधा नाम की महिमा को अत्यंत सहज और प्रेम पूर्ण भाव से समझाया- कि केवल “राधा” नाम का स्मरण करके हम जीवन की हर परिस्थिति का सामना धैर्य, विश्वास और शांति के साथ कर सकते हैं। उनके मार्गदर्शन से भक्त कृष्णभावनामृत की ओर अग्रसर हुए, जहाँ जीवन केवल कर्म नहीं बल्कि पूर्ण समर्पण बन जाता है। इसी लेख में हम उनके जीवन का परिचय जानेंगे

प्रेमानंद जी महाराज कौन है

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श्री प्रेमानंद जी महाराज का जन्म वर्ष 1969 में उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के सरसौल ब्लॉक में हुआ था। उनका वास्तविक नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे है। उनका जन्म एक साधारण किंतु संस्कारवान ब्राह्मण परिवार में हुआ, जहाँ धार्मिकता और भक्ति का वातावरण पहले से ही विद्यमान था। उनके पिता श्री शंभू नाथ पांडे धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे, और उनकी माता श्रीमती रमादेवी अत्यंत भक्ति भाव से परिपूर्ण महिला थी। परिवार में पहले से ही संन्यास की परंपरा चली आ रही थी- उनके दादाजी ने भी सन्यास ग्रहण किया था। इसी कारण बचपन से ही उनके मन में ईश्वर भक्ति के संस्कार स्वभाविक रूप से अंकुरित होने लगे।

बहुत छोटी उम्र से ही उनका मन अध्यात्म की ओर आकर्षित होने लगा। मात्र 5 वर्ष की आयु में ही उन्हें भजन कीर्तन में गहरी रुचि हो गई थी। कम उम्र में ही उन्होंने श्रीमद् भागवत गीता का अध्ययन प्रारंभ कर दिया और नियमित रूप से मंदिर में पूजा पाठ करने लगे।

सत्संग सुनते समय उनके मन में बार-बार एक गहरा विचार उभरता था कि एक दिन घर के सभी सदस्य एक-एक करके इस संसार से चले जाएंगे, तब इस दुनिया में मेरा कौन रहेगा, मैं किसके सहारे रहूंगा। इन विचारों ने उनके मन को भीतर तक झकझोर दिया। यही सुनकर हृदय में दृढ़ प्रेरणा जन्म लेने लगी कि मेरे तो केवल भगवान ही है, उनके अलावा मेरा कोई नहीं।

इसी भावना ने उन्हें सांसारिक मोह से विरक्त किया और उन्होंने बहुत कम उम्र में ही संन्यास के मार्गों को अपनाने का निश्चय कर लिया। इसके पश्चात वे वाराणसी गए, जहाँ उन्होंने अपना जीवन साधना, सेवा और तपस्या में व्यतीत किया। आगे चलकर वे वृंदावन पहुंचे और वहीं भगवान श्री कृष्ण व श्री राधा के चरणों में पूर्ण समर्पण के साथ भक्ति भाव से अपना जीवन व्यतीत करने लगे। आज भी वे वृंदावन की पावन भूमि पर रहकर अपने वचनों और साधना के माध्यम से असंख्य भक्तों के जीवन को आध्यात्मिक प्रकाश प्रदान कर रहे हैं।

प्रेमानंद जी महाराज कौन है

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प्रेमानंद महाराज के दर्शन कैसे होते हैं?

श्री प्रेमानंद जी महाराज के दर्शन करने के लिए प्रायः वे रात्रि लगभग 2:00 बजे वृंदावन के परिक्रमा मार्ग पर निकलते हैं। उस समय श्रद्धालु उनके दर्शन कर सकते हैं। हालांकि वर्तमान में उनकी तबीयत ठीक ना होने के कारण वे कभी-कभी ही परिक्रमा मार्ग पर आते हैं। जब वे आते भी है, तो प्रायः कार द्वारा दर्शन देते हुए निकलते हैं।

यदि आप उनसे प्रत्यक्ष रूप से मिलना चाहते हैं, तो यह सत्संग के माध्यम से संभव होता है। सत्संग के दौरान भक्त उन से आंतरिक वार्तालाप भी कर सकते हैं। इसके लिए आपको पहले टोकन लेना अनिवार्य होता है। टोकन एक दिन पहले लिया जाता है और इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता। टोकन प्राप्त करने के लिए आधार कार्ड आवश्यक होता है। टोकन लेने का समय प्रातः 6:00 से 8:00 तक होता है। टोकन मिलने के बाद आप महाराज जी से सत्संग और दर्शन का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

वृंदावन में प्रेमानंद जी महाराज का आश्रम कहाँ स्थित है?

श्री प्रेमानंद जी महाराज का आश्रम वृंदावन में स्थित है। आश्रम जाने के लिए सबसे पहले आपको रमन रेती चौराहा पहुँचना होता है। यह स्थान प्रेम मंदिर और इस्कॉन मंदिर के बीच स्थित है।

रमन रेती चौराहे से परिक्रमा मार्ग की ओर लगभग 400 मीटर चलने पर आपको महाराज जी के आश्रम का मुख्य द्वार दिखाई देता है। आश्रम के गेट पर “श्री हित राधा केलि कुंज” लिखा हुआ मिलता है। यह आश्रम भक्ति वेदांत हॉस्पिटल के ठीक सामने स्थित है। यही पर श्री प्रेमानंद जी महाराज निवास करते हैं और श्रद्धालु यहाँ उनके दर्शन एवं सत्संग का लाभ ले सकते हैं।

प्रेमानंद जी महाराज इतने प्रसिद्ध क्यों हैं?

श्री प्रेमानंद जी महाराज अपनी सरलता, सहज स्वभाव और मुख के तेज के कारण अत्यंत प्रसिद्ध है। उनकी वाणी में जो स्पष्टता और सच्चाई है, वह सीधे हृदय को स्पर्श करती है और लोगों को गहराई से समझ में आ जाती है। उनकी बातें जीवन के हर प्रकार के प्रश्नों का समाधान सरल शब्दों में प्रस्तुत करती है, इसी कारण लोग उनसे तुरंत जुड़ाव महसूस करते हैं।

महाराज जी राधा नाम की महिमा को इतने प्रेम और सहजता से बताते हैं कि उसे सुनकर मन स्वतः शांत हो जाता है। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी उनकी बातों को आसानी से समझ लेते हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से भी उनकी शिक्षाएँ लाखों लोगों तक पहुंचती है। उनकी मुस्कान, उनका तेज और उनका विनम्र स्वभाव ही उन्हें जन-जन का प्रिय संत बनाता है।

प्रेमानंद जी महाराज कौन है

निष्कर्ष

आज जब लोग यह जानना चाहते है कि प्रेमानंद जी महाराज कौन है, तो उनका जीवन और उनकी शिक्षाएँ स्वयं इसका उत्तर बन जाती है। श्री प्रेमानंद जी महाराज इस युग के एसे दिव्य संत है जिन्होंने भारत ही नहीं बल्कि, नई पीढ़ी के हृदय पर भी गहरा प्रभाव छोड़ा है। उनकी वाणी इतनी सरल, प्रेम पूर्ण और सच्ची है कि बड़े बुजुर्गों के साथ-साथ आज के युवा और छोटे बच्चे भी उन्हें पूरे मन से सुनते और अपनाते हैं।

प्रेमानंद जी महाराज कौन है

उन्होंने राधा नाम की महिमा को इस प्रकार समझाया है कि आज के समय में भी बच्चे और युवा मन की शांति, एकाग्रता और सकारात्मकता के लिए राधा नाम का जाप करते हैं। उनकी शिक्षाएँ केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने के लिए है। यही कारण है कि श्री प्रेमानंद जी महाराज आज भी असंख्य लोगों के लिए भक्ति, शांति और सही जीवन पथ का प्रकाश स्तंभ बने हुए हैं।

 FAQ-

प्रश्न 1. प्रेमानंद जी महाराज किस आश्रम में रहते हैं?

उत्तर. “श्री हित राधा केलि कुंज” आश्रम में रहते हैं।

प्रश्न 2. प्रेमानंद जी के गुरु कौन थे?

उत्तर. गुरु श्री हित गौरांगी शरण जी महाराज।

प्रश्न 3. प्रेमानंद जी ने पदयात्रा क्यों रोकी?

उत्तर. स्वास्थ्य खराब होने के कारण प्रेमानंद जी महाराज ने अपनी रात्रि की पदयात्रा को रोक दिया है।

प्रश्न 4. प्रेमानंद महाराज के माता-पिता का नाम क्या है?

उत्तर. पिता का नाम श्री शंभू नाथ जी और माता का नाम श्रीमती रमादेवी है।

प्रश्न 5. प्रेमानंद जी महाराज को कौन सी बीमारी थी?

उत्तर. प्रेमानंद महाराज को पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज (पीकेडी) है, जो किडनी की एक गंभीर बीमारी है।

प्रश्न 6. प्रेमानंद महाराज जी कितने पढ़े-लिखे हैं?

उत्तर. प्रेमानंद जी महाराज आठवीं तक पढ़े लिखे हैं पांचवी कक्षा से ही वे आध्यात्म की ओर बढ़ चुके थे।

हमें विश्वास है कि इस आर्टिकल के माध्यम से आपने समझा होगा की प्रेमानंद जी महाराज कौन है और उनसे कैसे मिल सकते हैं।

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