नमस्ते दोस्तों ! क्या आपने कभी इस बात पर विचार किया है कि बहुत सारे लोग बड़ी-बड़ी मुश्किलों में भी आगे बढ़ जाते हैं और नए मुकाम को हासिल कर लेते हैं। जबकि कुछ लोग छोटी-छोटी मुश्किलों में भी हार मान लेते हैं और पीछे रह जाते हैं। तो इसके पीछे का कारण क्या है ? क्या वे मेहनत नहीं करते हैं या योग्य नहीं है ? क्यों कुछ लोग आगे बढ़ जाते हैं और क्यों कुछ लोग पीछे रह जाते हैं ? तो इसके पीछे का कारण है उनका Mindset। आज हम इसी रहस्य को उजागर करेंगे कि Mindset kya hota hai और माइंडसेट कैसे करते हैं।

Mindset kya hota hai?
सामान्य भाषा में Mindset का मतलब होता है किसी व्यक्ति के सोचने का तरीका या किसी भी चीज को देखने का नज़रिया।
माइंडसेट का अर्थ होता है, आप किसी बात को कैसे समझते हैं, कैसे सोचते हैं और कैसे उस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं। आपका माइंडसेट ही यह तय करता है कि आप जिंदगी में आगे बढ़ेंगे या रुक जाएंगे। इसका मतलब है कि अगर आपके सामने कोई समस्या आती है तो आप उसका सामना करते हैं उस समस्या का समाधान ढूंढते हैं या फिर पीछे हट जाते हैं।
उदाहरण के लिए – दो ऑफिस वर्कर्स को उनके बॉस ने प्रेजेंटेशन के लिए कहा। पहला वर्कर सोचता है, ‘मुझसे नहीं होगा, मैं इतने सारे लोगों के सामने नहीं बोल सकता हूँ। मेरी कम्युनिकेशन स्किल्स भी अच्छी नहीं है।’ वह पीछे हट जाता है और हार मान लेता है। इस प्रकार यह व्यक्ति अपनी क्षमताओं को सीमित मानता है और चुनौतियों से बचता है।
जबकि दूसरा वर्कर सोचता है, ‘मुझे अवसर मिला है, मैं कर सकता हूँ। मैं प्रयास करूँगा और सीखूँगा। इससे मेरे प्रमोशन के चांस भी बढ़ेंगे।’ वह प्रेजेंटेशन देता है और सफल होता है। इस प्रकार यह व्यक्ति अपनी क्षमताओं को विकसित करने और चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहता है।
पहला वर्कर हार मानने के कारण एम्पलाई बनकर रह जाता है, जबकि दूसरा वर्कर अपने प्रयासों के कारण प्रमोशन पाता है और ऊँची पोस्ट पर पहुँचता है। यह दिखाता है कि माइंडसेट हमारे जीवन और करियर को कैसे प्रभावित कर सकता है।
Mindset के प्रकार- Two types of Mindset
1. Fixed Mindset-
Fixed Mindset में व्यक्ति सोचता है कि मैं कुछ नया नहीं कर सकता हूँ, मुझसे समस्याएँ हल नहीं हो सकती है और मैं जैसा हूँ, वैसा ही रहूँगा। और मेरे जीवन में कुछ नए परिवर्तन नहीं हो सकते हैं और यही मेरा जीवन है। और वे इससे आगे कुछ बड़ा सोचते भी नहीं है। कुल मिलाकर उनकी मानसिकता सीमित रहती है।
Fixed Mindset examples
उदाहरण 1 :
कड़ी मेहनत से भय
“अगर मुझे कड़ी मेहनत करनी पड़ी तो इसका मतलब है कि मैं टैलेंटेड नहीं हूँ।”
यह सोच बताती है कि व्यक्ति केवल सहज रूप से आने वाली सफलता को ही स्वीकार करता है और कठिनाई को कमजोरी समझता है।
उदाहरण 2 :
लोगों की प्रतिक्रिया का भय
“अगर मैं सफल नहीं हुआ तो लोग क्या कहेंगे, इसलिए प्रयास ही नहीं करता।”
यहाँ व्यक्ति असफलता के डर से खुद को साबित करने की कोशिश ही नहीं करता।
उदाहरण 3 :
दूसरों को खुद से बेहतर समझना
“वो तो बचपन से ही होशियार और बुद्धिमान है, मैं कभी उसके जैसा नहीं बन सकता।”
यह सोच बताती है कि व्यक्ति मानता है कि बुद्धिमत्ता जन्मजात होती है, जबकि ऐसा नहीं है वह कड़ी मेहनत और निरंतर प्रयास से भी पाई जा सकती है।
उदाहरण 4 :
नयी चीज़े सीखने का प्रयास नहीं करना
“कुछ नया सीखना मेरे बस की बात नहीं है, अब मेरी उम्र नहीं रही सीखने की।”
व्यक्ति अपनी क्षमता को सीमित मानता है और खुद का विकास नहीं कर पाता है।

2. Growth Mindset
Growth Mindset वाला व्यक्ति कभी भी चुनौतियों से घबराता नहीं है बल्कि समस्याओं का समाधान ढूंढता है। वह असफलताओं से डरता नहीं है, बल्कि असफलताओं से सीखता है उन्हें एक नए अवसर के रूप में समझता है। ग्रोथ माइंडसेट वाला व्यक्ति हमेशा कुछ ना कुछ नया सीखने का प्रयास करता हैं और खुद को दूसरों से बेहतर बनाता हैं।
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Growth Mindset वाले लोग क्या सोचते है ?
• मुझसे अभी नहीं हो रहा है, लेकिन मैं निरंतर प्रयास करूंगा तो हो जाएगा।
• मैं कर सकता हूँ, मेरे लिए सब कुछ संभव है।
• इस बार मुझसे गलती हो गई, लेकिन अगली बार में इस गलती को नहीं दोहराऊंगा।
• अगर वह इंसान कर सकता है, तो मैं भी कर सकता हूँ।
• समस्याएँ समाधान ढूंढने से सुलझती है चुपचाप बैठने से नहीं।
ग्रोथ माइंडसेट कैसे विकसित करें- How to build a growth Mindset
1. अपने शब्दों को पहचानें
क्या आप हमेशा खुद से कहते हैं कि “मैं नहीं कर सकता हूँ, ” “मुझे नहीं होगा”, “मैं योग्य नहीं हूँ।”
अगर हाँ तो यह फिक्स्ड माइंडसेट के लक्षण है, इसलिए सबसे पहले आप अपने शब्दों को पहचानिए और उन्हें ठीक कीजिए।
2. “अभी नहीं लेकिन एक दिन जरूर होगा” को अपनाइए
अगर आप अभी कुछ नहीं कर पा रहे हैं, तो खुद से कहिए “अभी नहीं हो रहा है लेकिन एक दिन जरूर होगा” और निरंतर प्रयास करते रहिए।
• यह सोच आपको हमेशा प्रेरित रखेगी।
3. गलतियों से सीखें
जब भी आप गलती करें तो उसे दोहराएं नहीं और उससे सीखने का प्रयास करें।
• खुद से कहे मुझसे इस बार गलती हो गई लेकिन अगली बार “मैं इसे दोहराऊंगा नहीं।”
4. लोगों की नकारात्मक बातों को खुले दिल से सुनें
जब भी लोग आपकी आलोचना करें तो उससे डरे नहीं बल्कि खुद में सुधार करने का प्रयास करें। उनसे पूछे कि, “मैं अगली बार इसे कैसे बेहतर कर सकता हूँ।”
• यह सोच आपको कुछ नया सीखने में मदद करेगी।
5. चुनौतियों का सामना करें
Comfort zone से बाहर निकलिए और कठिन रास्तों को चुनें। यह रास्ते आपको मजबूत बनाएंगे।
• कठिनाईयाँ ही तो growth का असली मैदान होती है।
6. पॉजिटिव बातें करें
रोज खुद से यह बातें कहे :
मैं कर सकता हूँ।
मैं हर दिन कुछ नया सीख रहा हूँ।
मैं कुछ बड़ा करने के लिए पैदा हुआ हूँ।
• यह बातें आपको आत्मविश्वास से भर देंगी।
7. नए परिवर्तन करें
रोज थोड़ा-थोड़ा करके खुद को बदलने का प्रयास करें। नई चीजें सीखें और मानसिक ग्रोथ करें।

Mindset of successful people
1. Arunima Sinha – एक पैर, लेकिन सोच अडिग।
अरुणिमा एक नेशनल वालीबॉल प्लेयर थीं। एक ट्रेन हादसे में उन्हें धक्का दिया गया और उनका एक पैर कट गया।
लोगों ने कहा – अब ये लड़की कुछ नहीं कर पाएगी। लेकिन अरुणिमा ने अपने माइंडसेट से अपनी जिंदगी का रूख मोड़ दिया।
उन्होंने एक पैर के साथ माउंट एवरेस्ट फतह कर ली और वह ऐसा करने वाली दुनिया की पहली विकलांग महिला बन गई।
• “बाधाएं शरीर में नहीं, बल्कि हमारे दिमाग में होती हैं। अगर सोच अडिग हो, तो पहाड़ भी छोटे लगते हैं।”
2. Dhirubhai Ambani – नौकरी से मना किया, लेकिन सपना बड़ा ही रखा।
धीरे-धीरे शुरू हुए – पेट्रोल पंप पर काम किया, फिर छोटे-मोटे बिज़नेस में हाथ डाला।
हर बार असफलता मिली, लेकिन उन्होंने कहा – “मैं सपने छोटे नहीं करूंगा, मेहनत बढ़ा दूंगा।”
आज रिलायंस भारत की सबसे बड़ी कंपनियों मे से एक है।
3. Sudha Chandran – पैरों से नहीं, सोच से नाची।
सुधा एक क्लासिकल डांसर थीं। एक एक्सीडेंट में उनका पैर काटना पड़ा।
लोगों ने कहा – अब तो करियर खत्म।
लेकिन उन्होंने कृत्रिम पैर के साथ दुबारा नृत्य करना शुरू किया और फिल्मों में भी काम किया। आज वो लाखों लोगों की प्रेरणा हैं।
• “जो लोग सोचते हैं कि ‘अब सब खत्म हो गया’, वो हार जाते हैं।
और जो कहते हैं – ये तो नई शुरुआत है’,वही जीतते हैं।”
4. Kalpana Saroj – झोपड़ी से करोड़ तक का सफर ।
एक दलित लड़की, गरीबी में पैदा हुई, बचपन में शादी हो गई, अत्याचार झेला। आत्महत्या तक की कोशिश की।
फिर उन्होंने ठान लिया – सोच बदलूंगी, दुनिया बदल जाएगी।
आज वह करोड़ों की कंपनी kamani Tubes Ltd. की मालिक है और पद्मश्री से सम्मानित है।
• “माइंड सेट बदलिए – हालात खुद ब खुद बदल जाएंगे।”
5. A.P.J. Abdul Kalam – झोपड़ी से राष्ट्रपति भवन तक।
तमिलनाडु के छोटे से गाँव में एक मछुआरे के बेटे ने बड़े सपने देखे।
पढ़ाई में मेहनत की, खुद पर विश्वास रखा। वैज्ञानिक बने, इसरो को ऊंचाई दी, और फिर भारत के राष्ट्रपति बने।
• “बड़े सपनों की शुरुआत छोटी सोच से नहीं, बल्कि बड़े माइंडसेट से होती है।”

निष्कर्ष-
माइंडसेट सिर्फ हमारे सोचने का तरीका नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरी जीवन को निर्धारित करता है। हमारी तरक्की, हमारा विश्वास, हमारे लक्ष्य, हमारी मेहनत – सब कुछ हमारे माइंडसेट से शुरू होता है। यदि हम फिक्स्ड माइंडसेट को छोड़कर ग्रोथ माइंडसेट को अपनाएं, तो संघर्ष अधिक हो सकते हैं, लेकिन असंभव दिखने वाली चीजें भी संभव हो जाती हैं। हर चुनौती हमें कुछ नया सीखाने आती है और हर असफलता एक सीढ़ी है सफलता की ओर।
याद रखिए –
आपका माइंडसेट ही आपकी वास्तविक शक्ति है। जैसा आप सोचते हैं, वैसा ही आप बनते हैं।
FAQ-
प्रश्न 1. अपनी मानसिकता की जांच कैसे करें?
उत्तर. अगर आपकी सोच सफल लोगों की जैसी है और उनके जैसे कदम उठाते हैं तो आप ग्रोथ माइंडसेट वाले व्यक्ति है और अगर ऐसा नहीं है तो आप फिक्स्ड माइंडसेट वाले व्यक्ति हैं।
प्रश्न 2. किस प्रकार की मानसिकता सबसे अच्छी है?
उत्तर. ग्रोथ माइंड सेट सबसे अच्छा होता है।
प्रश्न 3. 5 मिनट में माइंड फ्रेश कैसे करें?
उत्तर. आप पसंदीदा संगीत सुन सकते हैं, अपने किसी अच्छे दोस्त से बात कर सकते हैं, प्रकृति में समय बिता सकते हैं, अपने पसंद का कुछ खा सकते हैं आदि।
प्रश्न 4. माइंडसेट को हिंदी में क्या कहते हैं?
उत्तर. माइंडसेट का हिंदी अर्थ होता है, “मानसिकता”
प्रश्न 5. खुद को पॉजिटिव कैसे रखें?
उत्तर. खुद को पॉजिटिव रखने के लिए आप नकारात्मक वातावरण से दूर रहे, खुद के लिए सकारात्मक शब्दों का प्रयोग करें, अच्छी और प्रेरक वीडियोज देखें, बोलते वक्त नकारात्मक शब्दों का प्रयोग ना करें और कृतज्ञ रहे।
हमें विश्वास है कि आपको इस आर्टिकल के माध्यम से समझ आया होगा कि Mindset kya hota hai और माइंडसेट कैसे करते हैं।