दोस्तों, बोलना तो हम सभी को आता है। हम अपने मन मे कई बातें आसानी से सोच लेते हैं, लेकिन जैसे ही लोगों के सामने बोलने की बारी आती है, डर और घबराहट हमें रोक देती है। मंच पर खड़े होकर अपनी बात कहना आसान लगता है, लेकिन अंदर का डर हमें इतना प्रभावित करता है कि हम वही बातें भी ठीक से नहीं बोल पाते जिनकी हमने कई बार प्रैक्टिस की होती है।
ऐसे में सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि “पब्लिक स्पीकिंग क्या है और क्यों यह कौशल हमारे लिए इतना महत्वपूर्ण है।” इसी तरह यह जानना भी जरूरी है कि पब्लिक स्पीकिंग के डर को कैसे दूर करें, ताकि हम आत्मविश्वास के साथ अपनी बात किसी भी मंच पर रख सके।

पब्लिक स्पीकिंग क्या है।what is public speaking in hindi
पब्लिक स्पीकिंग (सार्वजनिक भाषण) एक ऐसा तरीका है जिसके माध्यम से आप अपनी बात, अपने विचार या अपना संदेश कई लोगों के सामने प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करते हैं। जब आप किसी एक व्यक्ति से बात करते हैं, तो उसे कन्वर्सेशन कहा जाता है। जैसे अपने दोस्त से बाते करना, परिवार से चर्चा करना या किसी अनजान व्यक्ति से बातचीत करना- यह सब कन्वर्सेशन ही है।
लेकिन जब आप सैकड़ो या हजारों लोगों के सामने किसी मंच पर खड़े होकर किसी विशेष विषय पर व्यवस्थित रूप से बोलते हैं, समझाते हैं या प्रेरित करते हैं- तो इसे पब्लिक स्पीकिंग या सार्वजनिक भाषण कहा जाता है।
कन्वर्सेशन में प्लानिंग की बहुत जरूरत नहीं होती, हम आम बोल-चाल के शब्दों में आराम से बात कर लेते हैं। लेकिन पब्लिक स्पीकिंग(सार्वजानिक भाषण) पूरी तरह तैयार होकर, प्लानिंग के साथ की जाती है।
इसमें आपको यह तय करना होता है कि क्या बोलना है, कैसे बोलना है और किस क्रम में बोलना है। साथ ही, सामान्य भाषा की जगह थोड़ा औपचारिक(Formal) शब्दों और स्पष्ट प्रस्तुति की जरूरत होती है।
यही कारण है कि पब्लिक स्पीकिंग एक कला भी है और एक कौशल भी।
पब्लिक स्पीकिंग के डर को कैसे दूर करें।How to overcome the fear of public speaking?
1.घर से शुरूआत करें
पब्लिक स्पीकिंग का डर मिटाने का सबसे आसान तरीका है- घर से शुरुआत करना।
किसी एक टॉपिक को चुने और पहले उसकी प्रेक्टिस कर लें।
फिर अपने परिवार के सामने उसी विषय पर बोलकर देखें।
घरवालों के सामने डर कम लगता है और वह आपकी गलतियाँ ईमानदारी से बताते हैं।
इससे आपका आत्मविश्वास और बोलने की क्षमता दोनों बढ़ती है।
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2. कंटेंट याद न करें, कॉन्सेप्ट समझें
कंटेंट रटने से घबराहट में शब्द गड़बड़ा जाते हैं।
इसके बजाय अपने टॉपिक का कॉन्सेप्ट गहराई से समझें।
जब विषय स्पष्ट होता है तो किसी भी स्थिति में आत्मविश्वास बना रहता है।
3. संभावित सवालों की लिस्ट बनाएं
सोचे कि आपका टॉपिक सुनकर लोग आपसे कौन-कौन से प्रश्न पूछ सकते हैं।
उन सारे सवालों के उत्तर पहले से तैयार करें।
ऐसा करने से आपको लगेगा कि आप पूरी तरह तैयार है- और यह डर को बहुत कम करता है।
4. मोबाइल पर रिकॉर्डिंग करें
अपने मोबाइल का कैमरा ऑन करें और 5-10 मिनट तक एक ही जगह खड़े होकर बोलें।
रिकॉर्डिंग देखे और अपनी गलतियों को नोट करें।
चाहे तो यह वीडियो परिवार या दोस्तों को बेचकर फीडबैक लें।
यह तरीका बहुत तेजी से कॉन्फिडेंंस बढ़ाता है।
5. छोटी शुरुआत करें
सीधे बड़े स्टेज या बड़ी भीड़ के सामने जाने की जरूरत नहीं है।
पहले सिर्फ 5 -10 लोगों के सामने बोलकर शुरुआत करें। धीरे-धीरे ऑडियंस बढ़ाए- इससे प्राकृतिक रूप से आपका डर खत्म होगा।

6. वही भाषा चुने जिसमें आप कंफर्टेबल हो
पब्लिक स्पीकिंग(सार्वजानिक भाषण) में कठिन शब्दों की जरूरत नहीं होती।
जिस भाषा में आप सहज हो, उसी में स्पष्ट और सरल तरीके से बोले।
सरल भाषा आपकी बात को और भी प्रभावी बनाती है।
7. अच्छे स्पीकर्स को ऑब्जर्व करें।
जिनकी स्पीकिंग आपको पसंद है, उनके सेमिनार अटेंड करें या उनकी वीडियो देखें।
उनका टोन, बॉडी लैंग्वेज, स्टेज प्रेज़ेस, पोज़ और बोलने की शैली ध्यान से देखें।
इससे आपको सीखने को मिलेगा कि एक अच्छा स्पीकर कैसा होता है- और यह सीख आपका डर बहुत कम कर देती है।
सार्वजनिक भाषण में सबसे महत्वपूर्ण बात क्या है?
एक अच्छा स्पीकर बनने के लिए सिर्फ बोलना ही काफी नहीं होता, बल्कि कई महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान देना जरूरी है। सबसे पहले अपनी ऑडियंस की बातों, उनके फीडबैक और उनके सवालों को समझना सीखे।
अगर आप सिर्फ बोलते जाएँ और सामने बैठी ऑडियंस को मौका ही न दें तो वह आपकी स्पीच में अपना इंटरेस्ट खो सकती है। इसलिए समय-समय पर उनका फीडबैक लें, उनकी प्रतिक्रियाओं को देखें और उसी के अनुसार अपने स्पीच को एडजस्ट करें।
सार्वजनिक भाषण एक तरह की पावर है, और पावर के साथ हमेशा जिम्मेदारी भी आती है। एक पब्लिक स्पीकर होने के नाते आपका फर्ज है कि आप लोगों को सही जानकारी दें। अगर किसी विषय के बारे में आपको जानकारी नहीं है, तो उस पर बोलने की कोशिश न करें।
पहले खुद सीखें, पूरी रिसर्च करें और फिर लोगों के सामने प्रस्तुत करें। गलत या झूठी जानकारी देने से आपकी विश्वसनीयता कम होती है।
एक अच्छा स्पीकर बनने की सबसे बड़ी शर्त है कि आप पहले अच्छे लिस्नर बने। जो व्यक्ति ध्यान से सुनना सीख जाता है, वही सामने वाले की भावनाओं, उसके सवालों और उसकी जरूरतों को समझ पाता है- और कोई जो समझता है, वही प्रभावी ढंग से बोल भी सकता है।

एक अच्छा स्पीकर कैसे बने।How to become a good speaker
1. ड्रेसिंग सेंस – एक स्पीकर की पहली पहचान
जब आप हजारों लोगों के सामने बोलने जा रहे हो, तो आपका ड्रेसिंग सेंस आपकी पहली छाप बनाता है। इसलिए यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि आपके कपड़े
साफ-सुथरें हों,
आरामदायक हों,
बहुत ज्यादा चमकीले या डार्क न हों
और मोके तथा माहौल के अनुसार हों।
ऐसे कपड़े पहन कर न जाएँ जिनमें आप खुद असहज महसूस करें या जो देखने में बहुत भड़काने वाले हों।
आपका पहनावा प्रोफेशनल, सादगीपूर्ण और आपके व्यक्तित्व को दर्शाने वाला होना चाहिए। एक अच्छा स्पीकर हमेशा अपने कपड़ों से में क्लीन, कॉन्फिडेंट और प्रेंज़ेटेबल दिखाई देता है।
2. ऑडियंस से इंटरैक्शन करें
एक सफल स्पीच की शुरुआत सिर्फ बोलने से नहीं होती। बल्कि ऑडियंस से जुड़ने से होती है। स्टेज पर पहुँचते ही सीधे अपने टॉपिक पर न जाएँ।
पहले अपनी ऑडियंस से हल्की-फुल्की बातचीत करें:
हाल-चाल पूछें, मुस्कुराकर उन्हें देखें,
पूछे कि वे किस उद्देश्य से आए हैं, और थोड़ा माहौल हल्का करें।
यह शुरुआत आपकी ऑडियंस को आपके करीब लाती है और उन्हें आपसे जुड़ा हुआ महसूस कराती है। चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान रखें और सामने वाली लाइन के लोगों से आँख मिलाकर बात करें। यह सब आपके आत्मविश्वास को भी दिखता है और ऑडियंस की दिलचस्पी भी बढ़ाता है।

3. टॉपिक पर फोकस रखें
जब आप स्टेज पर हो, तो आपकी बातों का पूरा ध्यान टॉपिक पर ही केंद्रित होना चाहिए। शुरुआत में ऑडियंस को हल्के -फुल्के तरीके से अपने विषय से जोड़े।
उदाहरण के लिए : अगर आपका टॉपिक माइंडसेट है, तो पहले बताइए कि माइंडसेट क्या होता है, इसके कितने प्रकार होते हैं और यह हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करता है।
ध्यान रहे कि अपनी भाषा में आम बोलचाल के शब्द, सरल और फॉर्मल भाषा का उपयोग करें।
बहुत भारी भरकम शब्दों से बचें, ताकि हर व्यक्ति आपको आसानी से समझ सकें।
4. अपनी स्पीच को ऑर्गेनाइज़ करें
एक प्रभावशाली स्पीच हमेशा अच्छी प्लानिंग और सही क्रम पर निर्भर करती है। इसलिए अपनी स्पीच को पहले से प्लान करना बहुत ज़रूरी है।
स्पीच को इस क्रम में तैयार करें :
• Introduction(परिचय)
शुरुआत में अपने टॉपिक का आसान और आकर्षक परिचय दें।
• Main Body(मुख्य विषय)
अपने टॉपिक को छोटे-छोटे भागो में बांट कर समझाएं।
हर बिंदु के साथ उदाहरण या सरल व्याख्या दें
• Conclusion(निष्कर्ष)
अंत में अपने विषय का सार बताएं। उसके फायदे, नुकसान या मुख्य सिख का उल्लेख करते हुए स्पीच को प्रभावी तरीके से खत्म करें।
इस तरह से की गई प्लानिंग से आपको भी पता रहेगा कि किस पॉइंट के बाद क्या बोलना है। इससे आपकी स्पीच पूरी तरह संगठित, स्पष्ट और प्रभावशाली बनेगी।
5. टॉपिक चुनना
टॉपिक चुनते समय हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि वह विषय आपको अच्छी तरह समझ में आता हों। जिस टॉपिक पर आपकी पकड़ मजबूत नहीं होगी, उस पर स्टेज पर बोलते समय आप हड़बड़ा सकते हैं और लोगों के सामने अपनी बात स्पष्ट रूप से नहीं रख पाएंगे।
साथ ही, कोशिश करें कि आपका टॉपिक ऑडियंस के लिए थोड़ा नया हो, जब लोग कोई नई चीज़ सीखते हैं, तो वह अधिक ध्यान से सुनते है और आपकी स्पीच में उनका इंटरेस्ट बना रहता है।
6. अपनी ऑडियंस को समझे
स्पीच देने से पहले यह समझना बहुत जरूरी है कि आपकी ऑडियंस कौन है और वह क्या सुनना चाहते हैं।
हमेशा शुरुआत में अपनी ऑडियंस को ऑब्जर्व करें- वह किस उम्र के हैं, किस उद्देश्य से आए हैं और उनकी अपेक्षाएँ क्या है।
उदाहरण के लिए, अगर आपकी ऑडियंस में ऐसे लोग अधिक है जो अपनी मैरिड लाइफ से जुड़े समाधान खोज रहें हैं, तो आप उसी विषय पर एक मजबूत, रिलेटेबल स्पीच तैयार कर सकते हैं। जब आप उनकी प्रॉब्लम से जुड़े मुद्दों पर बात करते हैं, तो वह आपसे जुड़ाव महसूस करते हैं।

7. ऑडियंस से कनेक्शन बनाएं
ऑडियंस की मानसिकता को समझने का सबसे आसान तरीका है – शुरुआत में उनसे बातचीत करना। आप उनसे पूछ सकते हैं :
आप कहाँ से आए हैं?
आप यहां आने का आपका मकसद क्या है?
आप क्या सीख कर जाना चाहते हैं?
इस तरह की बातचीत से आपको पता चलेगा कि वह क्या सोच रहे हैं, किस माइंडसेट में है और आपकी स्पीच को किस दिशा में ले जाना है। जब आप उनकी अपेक्षाओं के अनुसार बोलते हैं, तो आपकी स्पीच न सिर्फ प्रभावी बनती है बल्कि उनसे आपका कनेक्शन भी मजबूत होता है।
8. टॉपिक से जुड़े सपोर्टिंग मैटेरियल्स का उपयोग
जब भी आप किसी टॉपिक पर स्पीच दें, उससे जुड़े सपोर्टिंग मैटेरियल्स का इस्तेमाल जरूर करें। आप फोटो, पीपीटी या पीडीएफ बनाकर अपनी बात को और ज्यादा स्पष्ट कर सकते हैं। विजुअल मैटेरियल्स ऑडियंस का ध्यान खींचते हैं और उन्हें आपकी बातें बेहतर तरीके से समझ में आती है।
9. ऑडियंस को लगातार शामिल रखें
स्पीच के दौरान सिर्फ बोलते ही न रहेें – ऑडियंस को भी शामिल करें।
बीच-बीच में उनसे सवाल पूछते रहे ताकि उनका इंटरेस्ट बना रहें।
यदि आप कोई सवाल पूछते हैं, तो कोशिश करें कि किसी एक व्यक्ति को खड़ा करके उस सवाल का जवाब दिलवाएं। इससे ऑडियंस को लगता है कि वह भी स्पीच का हिस्सा और माहौल और भी इंटरएक्टिव हो जाता है।
10. टास्क और एक्टिविटीज़ दे
अगर आपका टॉपिक ऐसा है जहां न्यूमेरिकल, या छोटे-छोटे टास्क कराए जा सकते हैं, तो ऑडियंस को हल्के-फुल्के टास्क दें। जैसे – किसी प्रश्न का हल पूछना।
छोटा-सा कैलकुलेशन
एक पोज़ देकर उनसे राय लेना
इससे आपकी स्पीच न सिर्फ मजेदार होती है बल्कि ऑडियंस खुद को जुड़ा हुआ महसूस करती है।
11. मोटिवेशनल कोट्स का उपयोग करें
बीच-बीच में विषय से जुड़े हुए छोटे और प्रभावशाली मोटिवेशनल कोट्स जरूर शामिल करें। यह आपकी स्पीच को मजबूत बनाते हैं, आपके शब्दों में दम जोड़ते हैं और दर्शक आपकी बातों को ज्यादा देर तक याद रखते हैं।
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नतीजा- जब आप सपोर्टिंग मटेरियल, सवाल-जवाब, छोटे टास्क और मोटिवेशनल कोट्स का सही तरीके से उपयोग करते हैं, तो आपकी स्पीच बहुत प्रभावशाली बन जाती है। लोग आपको पसंद करते हैं, आपकी बातें ध्यान से सुनते है और आप एक मजबूत, यादगार और प्रभावशाली स्पीकर बनते हैं।
सार्वजनिक भाषण के 3P कौन से हैं?
Preparation – तैयारी
तैयारी का मतलब सिर्फ कंटेंट बनाना नहीं, बल्कि यह समझना है कि: आपकी ऑडियंस कौन है
वे आपसे क्या सीखना चाहती है
आपके टॉपिक का उद्देश्य क्या है
जब यह स्पष्ट हो जाए, तब स्पीच एसी बनती है जो सीधे लोगों के दिल और दिमाग तक पहुंचती है।
Practice – अभ्यास
अभ्यास आपका सबसे बड़ा हथियार है। आपको : स्पीच को कई बार जोर से बोलकर प्रेक्टिस करना चाहिए
खुद को एक बड़ी ऑडियंस के सामने बोलते हुए इमेजिन करना चाहिए
अपनी आवाज, टोन और बॉडी लैंग्वेज पर ध्यान रखना चाहिए
जितना अधिक अभ्यास, उतनी अधिक आत्मविश्वास की चमक।
Performance – प्रदर्शन
यही वह पल होता है जब आप अपनी स्पीच को लोगों के सामने पेश करते हैं। यह जरूरी है कि :
आप सरल और स्पष्ट बोलें
ऑडियंस को जोड़कर रखें
उनके सवालों और रिएक्शन पर ध्यान दें
अच्छा प्रदर्शन वही है जहाँ लोग आपको सुनते नहीं – महसूस करते हैं।
निष्कर्ष-
सार्वजनिक भाषण केवल शब्द नहीं, बल्कि आपके विचारों और आत्मविश्वास का प्रदर्शन हैं। जब आप ऑडियंस को समझते हैं, तैयारी और अभ्यास के साथ मंच पर बोलते हैं, तो आप सिर्फ स्पीकर नहीं, बल्कि प्रभावशाली कम्युनिकेटर बन जाते हैं। सार्वजनिक भाषण एक कला है – अभ्यास और आत्मविश्वास से हर कोई इसे सीख सकता है।
FAQ:
प्रश्न 1. भारत का नंबर वन मोटिवेशनल स्पीकर कौन है?
उत्तर. भारत का नंबर वन मोटिवेशनल स्पीकर कोई एक नहीं है लेकिन जाने-माने मोटिवेशनल स्पीकर्स में है – संदीप महेश्वरी, सोनू शर्मा और विवेक बिंद्रा।
प्रश्न 2. स्पीच के लास्ट में क्या बोले?
उत्तर. अपनी स्पीच का अंत “धन्यवाद बोलकर या कोई मोटिवेशनल लाइन” से खत्म करें।
हमें विश्वास है कि इस आर्टिकल के माध्यम से आपको समझ आया होगा कि पब्लिक स्पीकिंग क्या है और इसके डर को कैसे खत्म करें, धन्यवाद।