नमस्ते दोस्तों ! आज हम एक ऐसे नए और रोचक विषय पर चर्चा करने जा रहे हैं जो हमारे भविष्य का निर्माण करता है – कर्म। अगर आप कर्म के बारें में जान लेते हैं, तो आप अपने भविष्य को उज्ज्वल बना सकते हैं। कर्म हमारे जीवन को आकार देता है और हमारे कार्यों का परिणाम हमें भविष्य में मिलता है। आइए जानते हैं कि कर्म क्या है, अच्छे कर्म क्या है और कर्म के कितने प्रकार होते हैं। इस लेख में, हम कर्म की अवधारणा को गहराई से समझने की कोशिश करेंगे और इसके प्रभाव को जानने का प्रयास करेंगे।

अब हम जानेंगे कर्म क्या है।
कर्म क्या है- what is karma?
कर्म हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जो हमारे विचारों, वाणी और क्रियाओं के माध्यम से परिभाषित होता है। सरल शब्दों में, हमारा सोचना, उठना, चलना, बोलना, खाना, सोना और कुछ करना – सभी कर्म के अंतर्गत आते हैं। यह सारी क्रियाएं कर्म कहलाती है।
कर्म वह क्रिया है जो हम शरीर, वाणी और मन से करते हैं। हमारे विचार, भावनाएँ और शब्द हमारे कर्म को निर्धारित करते हैं। यदि हमारे विचार, शब्द और भावनाएँ अच्छे हैं, तो इसका मतलब है कि हमने अच्छे कर्म किए हैं। इसके विपरीत, यदि हमारे विचार, भावनाएँ और शब्द नकारात्मक है या हम इन्हें गलत तरीके से उपयोग करते है, तो इसका मतलब है कि हमारे द्वारा किए गए कर्म बुरे हैं।
हम तीन तरीके से कर्म करते हैं।
शरीर से : हमारी शारीरिक क्रियाएं, जैसे कि चलना, उठना, बैठना आदि।
वाणी से : हमारे शब्द और बोलचाल जैसे की बात करना, लिखना आदि।
मन से : हमारे विचार और भावनाएँ, जैसे की सोचना, महसूस करना आदि।
कर्म कितने प्रकार के होते हैं-how many types of karma
• क्रियमाण कर्म
क्रियमाण कर्म वे कर्म है जो हम वर्तमान में करते हैं। यह हमारे दैनिक जीवन में किए जाने वाले कार्य हैं, जैसे कि सुबह उठना, काम करना, बात करना आदि। क्रियमाण कर्म हमारे भविष्य को आकार देते हैं।
• संचित कर्म
संचित कर्म हमारे पिछले जन्म या जीवन में किए गए कर्मों का संग्रह है। यह हमारे अतीत में किए गए कर्मों का परिणाम है, जो अभी हमारे जीवन को प्रभावित करने के लिए तैयार है।
• प्रारब्ध कर्म
प्रारब्ध कर्म हमारे संचित कर्मों का फल है, जो हमें वर्तमान में मिल रहा है। यह हमारे पिछले जन्म में किए गए कर्मों का परिणाम है, जो अभी हमारे जीवन में फल दे रहा है।
अच्छे कर्म कैसे करें(how to do good karma)
• विचारों के माध्यम से अच्छे कर्म-
जब हम दूसरों के प्रति अच्छे विचार रखते हैं, तो यह हमारे अच्छे कर्मों का एक महत्वपूर्ण गुण है। अच्छे विचार रखने से हमारा मन शुद्ध होता और हमारे कर्म भी अच्छे होते हैं।
जैसे– किसी के बारे में बुरा नहीं सोचना, किसी के प्रति नकारात्मक भाव नहीं रखना, किसी से ईर्ष्या नहीं करना, किसी से घृणा नहीं करना, दूसरों के प्रति सकारात्मक विचार रखना।
• वाणी के माध्यम से अच्छे कर्म-
जब हम अपनी वाणी का उपयोग दूसरों की प्रशंसा करने, प्रोत्साहित करने और प्रेरित करने में करते हैं, तो यह हमारे अच्छे कर्मों का एक महत्वपूर्ण गुण है। हमारी वाणी का उपयोग करके हम दूसरों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
जैसे– किसी व्यक्ति को प्रेरित करना जो निराश है, किसी की प्रशंसा करना जो उसके आत्मविश्वास को बढ़ाएं, किसी ऐसे व्यक्ति को प्रोत्साहित करना जो किसी नए काम को शुरू करने के लिए तैयार नहीं है।
• कार्यों के माध्यम से अच्छे कर्म-
जब हम ऐसे कार्य करते हैं जिससे दूसरों की मदद होती है, जैसे कि बड़े बुजुर्गों की सेवा करना, गरीबों को खाना खिलाना, मंदिरों में दान देना, गौ माता को खाना खिलाना, लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करना।

बुरे कर्म क्या है?
जब हम दूसरों के प्रति नकारात्मक विचार रखते हैं, उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं और उनके प्रति हानिकारक कार्य करते हैं, तो यह हमारे बुरे कर्मों में सम्मिलित होता है।
हमारे विचारों में नकारात्मकता, जैसे कि किसी का बुरा सोचना, ईर्ष्या करना और नकारात्मक भाव रखना, हमारे बुरे कर्मों की शुरुआत हो सकती है।
हमारी वाणी के माध्यम से भी हम बुरे कर्म कर सकते हैं, जैसे कि किसी का अपमान करना, दूसरों को हर्ट करने वाली बातें कहना और नकारात्मक शब्दों का उपयोग करना।
इसके अलावा, हमारे कार्य भी बुरे हो सकते हैं, जैसे कि चोरी करना, किसी की हत्या करना, बेईमानी करना, बड़े बुजुर्गों का सम्मान नहीं करना और गैर कानूनी कार्य करना। यह सभी कार्य हमारे बुरे कर्मों में सम्मिलित होते है और दूसरों के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
कर्म हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करता है?
कर्म से हमारे जीवन पर दो प्रकार के प्रभाव पड़ते हैं- सकारात्मक प्रभाव और नकारात्मक प्रभाव। यह प्रभाव हमारे कर्मों पर निर्भर करता है।
• सकारात्मक प्रभाव-
जब हम अच्छे कर्म करते हैं, जैसे कि ईमानदारी से काम करना, दूसरों की सेवा करना, सत्य बोलना और अच्छे इरादे रखना, तो हमारे जीवन में सकारात्मकता आती है। इससे हमें सफलता मिलती है, हमारे संबंध सुधरते और हम खुश रहते हैं। हमारे भविष्य में उज्जवलता आती है और हमारा जीवन आनंदमय बन जाता है।
• नकारात्मक प्रभाव-
जब हम बुरे कर्म करते हैं, जैसे कि घृणा व्यक्त करना, दूसरों का सम्मान नहीं करना, बेईमानी करना और गलत कार्य करना, तो हमारे जीवन में नकारात्मकता आती है। इससे हमारे रिश्ते खराब होते हैं, प्रगति नहीं होती और हम कभी खुश नहीं रहते। हमारे भाग्य बिगड़ जाते हैं। हम गलत राह पर जा सकते हैं।
क्या कर्म हमारे भाग्य को बदल सकता है?
जी हाँ, कर्म हमारे भाग्य को बदल सकता है। हमारा भाग्य हमारे विचारों, भावनाओं और कार्यों पर निर्भर करता है, और कर्म भी इन्हीं पर आधारित होता है। यदि हमारे विचार, भावनाएं और कार्य अच्छे होंगे, तो हमारे कर्म भी अच्छे होंगे और हमारा भाग्य भी अच्छा होगा।
अच्छे कर्म करने से हम अपने भाग्य को बदल सकते हैं। यह न केवल हमारे पिछले कर्मों के प्रभाव को कम करता है, बल्कि हमें एक अच्छा भाग्य बनाने में भी मदद करता है। इसलिए, अच्छे कर्म करना और सही दिशा में कार्य करना हमारे लिए सफलता की राह चुनने और स्वयं का भाग्य स्वयं लिखने का अवसर प्रदान करता है।
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गीता के अनुसार कर्म क्या है?
गीता के अनुसार कर्म का अर्थ केवल शारीरिक कार्यों से नहीं है, बल्कि हमारी मानसिक गतिविधियों से भी जुड़ा हुआ है। जैसे कि जब हम किसी को कुछ देते हैं, तो हमारी नियत और भावनाएँ भी एक कर्म है। अगर हमने अच्छे भाव से दिया है, तो यह एक अच्छा कर्म है, लेकिन अगर हमने दुःखी मन से या खोट वाली भावना से दिया है तो यह एक बुरा कर्म है।
उदाहरण के लिए, अगर मैं किसी गरीब व्यक्ति को खाना देता हूँ, और मेरी नियत है कि मैं उसकी मदद करना चाहती हूँ, तो यह एक अच्छा कर्म है। लेकिन अगर मैं उसी व्यक्ति को खाना देती हूँ, और मेरी नियत है कि मैं उसे नीचा दिखाना चाहती हूँ, तो यह एक बुरा कर्म है।
गीता हमें सिखाती है कि कर्म का अर्थ है फल की इच्छा किए बिना कर्म करना। जब हम बिना फल की इच्छा से कर्म करते हैं, तो हम अपने आप को अपने कार्यों के प्रति अधिक जागरूक बनाते हैं, और हम अपने जीवन को एक नए अर्थ और उद्देश्य के साथ जीने का प्रयास करते हैं।

कर्म का फल कौन देता है?
कर्म का फल कोई देता नहीं है, बल्कि यह हमारे कर्मों के अनुसार decide होता है। यह प्रकृति का एक नियम है, जिसमें एक algorithm बना हुआ है जो ऑटोमेटेकली काम करता है। जैसे कि आप जैसा कर्म करेंगे, उसी के अनुसार आपको फल मिलता जाएगा। यदि आप अच्छे कर्म करेंगे, तो आपको अच्छा फल मिलेगा, और यदि आप बुरे कर्म करेंगे, तो आपको बुरा फल मिलेगा।
यह algorithm ऐसा है कि हमारे पिछले कर्मों के परिणाम स्वरुप हमें वर्तमान में फल मिलता है। यदि हमने पिछला कोई अच्छा कर्म किया है, तो वर्तमान में हमें उसका अच्छा फल मिलता है। और यदि हमने पिछला कोई बुरा कर्म किया है, तो वर्तमान में हमें उसका बुरा फल मिलता है।
यदि हम वर्तमान में अच्छे कर्म नहीं करते है, तो हमारे कर्म संचित हो जाते है और भविष्य में हमें उनका फल मिलता है। यह एक तरह का नियम है जो हमारे कर्मों के अनुसार काम करता है।

बुरे कर्म कैसे तोड़े?
बुरे कर्म को तोड़ने के लिए सबसे पहले आपको अपने जीवन में अच्छे कर्म अपनाने होंगे। जब आप अच्छे कर्म करने लगेंगे, तो बुरे कर्म अपने आप ही टूटने लगेंगे। इससे आपके बुरे कर्मों का प्रभाव भी कम हो जाएगा और आप अपने जीवन में सुखी रहेंगे।
मनुष्य का सबसे बड़ा कर्म क्या है?
मनुष्य का सबसे बड़ा कर्म है खुद को पहचानना और अपने धर्म के अनुसार कर्म करना। जब हम खुद को पहचानते हैं और अपने धर्म के अनुसार कर्म करते हैं, तो हम अपने जीवन को सार्थक बनाते हैं और अपने उद्देश्य को प्राप्त करते हैं।
Karma quotes-
- “कर्म ही पूजा है, कर्म ही सेवा है।”
- “जैसा कर्म करेंगे, वैसा ही फल मिलेगा।”
- “कर्म का सिद्धांत बहुत सरल है- आप जैसा बोते हैं, वैसा ही काटते हैं।”
- “कर्म करने से पहले उसके परिणामों के बारे में सोचें।”
- “अच्छे कर्म करने से आत्मा को शांति मिलती है।”
- “कर्म ही जीवन का मूल है, इसलिए अच्छे कर्म करने का प्रयास करें।”
- “आपके कर्म आपके चरित्र को दर्शाते है।”
- “कर्म का फल अवश्य मिलता है, चाहे देर से ही सही।”
निष्कर्ष-
कर्म हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जो हमारे भविष्य को आकार देता है। यह समझना कि कर्म क्या है और इसका महत्व क्या है, हमें अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जाने में मदद करता है। अतः, हमें अच्छे कर्म करने का प्रयास करना चाहिए और गलत राह पर जाने से बचना चाहिए। अच्छे कर्म हमें सफलता और खुशी की ओर ले जाते हैं जबकि बुरे कर्म हमारे जीवन में नकारात्मकता लाते हैं।
FAQ-
प्रश्न 1. कर्म की शक्ति क्या है?
उत्तर. कर्म की शक्ति हमारे जीवन को बदलने में है, जो हमारे विचार और कार्यों पर निर्भर करती है।
प्रश्न 2. कर्म और भाग्य का क्या संबंध है?
उतर. कर्म और भाग्य का संबंध यह है कि हमारे कर्म हमारे भाग्य को आकार देते हैं।
प्रश्न 3. किस्मत खराब हो तो क्या करें?
उत्तर. अगर आपकी किस्मत खराब है, तो आप अच्छे कर्म करके अपनी किस्मत को बदलने का प्रयास कीजिए।
प्रश्न 4. कर्म बड़ा है या भाग्य?
उत्तर. कर्म और भाग्य में सबसे बड़ा कर्म है, क्योंकि हम कर्म के माध्यम से ही भाग्य का निर्माण करते हैं।
प्रश्न 5. कलयुग में सबसे बड़ा पुण्य क्या है?
उत्तर. कलयुग में सबसे बड़ा पुण्य दूसरों की सेवा करना है- खासकर बड़े-बुजुर्गों की।
हमें विश्वास है कि, इस आर्टिकल के माध्यम से आपको समझ आया होगा कि कर्म क्या है और अच्छे कर्म कैसे करें, धन्यवाद।