कंफर्ट जोन क्या होता है: 5 टिप्स बाहर आने के लिए

नमस्ते दोस्तों ! क्या आपकी जिंदगी भी एक जगह ठहर गई है? क्या आपके दिमाग में भी एक ऐसा आरामदायक पैटर्न बन चुका है, जिससे आप बाहर निकलना तो चाहते हैं लेकिन निकल नहीं पा रहे? आपको पता है कि यह पैटर्न आपको रोक रहा है, दर्द भी देता है, फिर भी आप उसे एडजस्ट करके उसी में फंसे रहते हैं।

आप बाहर क्यों नहीं आ पा रहे हैं? क्योंकि आप कंफर्ट जोन के जाल में फंस चुके हैं।

आज हम नीचे बताएंगे कि कंफर्ट जोन क्या होता है और कंफर्ट जोन से बाहर कैसे निकले, ताकि आप अपनी जिंदगी को फिर से नई दिशा दे सकें।

तो आज हम बात करेंगे दो तरह के जोन की – एक होता है कंफर्ट जोन और दूसरा होता है ग्रोथ जोन।

कंफर्ट जोन क्या होता है

कंफर्ट जोन क्या होता है।what is comfort zone in hindi

कंफर्ट जोन वह जगह है, जहाँ हमें सब कुछ अच्छा, आसान और सुरक्षित लगने लगता है। यहाँ हर चीज़ हमारे हिसाब से चलती है – वही डेली रूटीन, वही आदतें, वही लोग, वही काम..बिल्कुल एक सेफ बबल जैसा।

कंपटीशन कम लगता है, चुनौतियाँ कम होती है और हर चीज़ इज़ी लगती है।

लेकिन असली समस्या यह है कि इस जगह पर ग्रोथ रुक जाती है। हमारी जिंदगी एक ही जगह थम जाती है। खर्च बढ़ते हैं, कमाई वही रहती है, और हम एडजस्ट करते-करते खुद को यह यकीन दिला देते हैं कि “सब ठीक चल रहा है।”

कभी-कभी यह स्थिति हमें दर्द भी देती है, परेशानी भी होती है, लेकिन फिर भी हम उसी में कंफर्टेबल हो जाते हैं। और सबसे बड़ी बात – हम बाहर निकलने के लिए कोई एफर्ट ही नहीं डालते।

ग्रोथ जोन क्या है।What Is Growth Zone

ग्रोथ जोन वह जगह है जहाँ आपको डर भी लगता है और अनिश्चितता भी होती है, लेकिन यही वह क्षेत्र है जहाँ असली लर्निंग और प्रोग्रेस होती है। यही आप नई-नई स्किल्स सीखते हैं, नए लोगों से जुड़ते है, नई शुरुआत करते हैं और नए अनुभवों से आगे बढ़ने का मौका मिलता है।

इस जोन में आप सुरक्षित महसूस नहीं करते, क्योंकि यहाँ आपको कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

लेकिन इन्हीं चुनौतियों को फेस करते हुए आप अपनी क्षमता, आत्मविश्वास और लाइफ को अगले स्तर पर ले जाते हैं।

कम्फर्ट जोन और ग्रोथ जोन में क्या अंतर है।Difference Between Comfort Zone and Growth Zone

ग्रोथ जोन आपको इवॉल्व करता है, आगे बढ़ाता है, आपको ज्यादा अनुभवी, आत्मविश्वासी और जीवन में सफल होना सिखाता है।

वही कंफर्ट जोन आपको सेफ तो रखता है, लेकिन एक ही जगह पर रोक देता है।

ग्रोथ जोन में आप नई स्किल्स सीखतें हैं, नए तरीके अपनाते हैं, चुनौतियों का सामना करते हैं और खुद को बेहतर बनाते हैं।

लेकिन कंफर्ट जोन में आप धीरे-धीरे आलसी बन जाते हैं, चीजों में रुचि कम होने लगती है और हर परिस्थिति में एडजस्ट करना व समझौता करना आपकी आदत बन जाती है।

उदाहरण – कंफर्ट जोन में अगर आपके खर्च ज्यादा है और कमाई कम है, तो आप खर्चों को कम करके अपनी कमाई के अनुसार खुद को एडजस्ट कर लेते हैं। आप खुद को समझा देते कि “सब ठीक चल रहा है” और इसी सोच में फंसे रहते हैं। यही कंफर्ट जोन है।

कंफर्ट जोन क्या होता है

लेकिन ग्रोथ जोन में ऐसा नहीं होता। अगर आपकी कमाई कम हैं और खर्च ज्यादा, तो आप कमाई बढ़ाने के तरीके ढूंढ़ने लगते हैं। आप नई स्किल्स सीखते हैं, नए अवसर तलाशते हैं, इनकम के नए स्रोत बनाते हैं और अपने आप को आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं। यही असली ग्रोथ जोन हैं – जहां आप रुकते नहीं बल्कि आगे बढ़ते हैं।

कंफर्ट जोन से बाहर क्यों नहीं निकल पाते?

आप कंफर्ट जोन से इसलिए बाहर नहीं निकल पाते, क्योंकि आपके अंदर कई तरह के डर मौजूद होते हैं। जिस फील्ड में आप आगे बढ़ना चाहते हैं, उसमें आपको सही नॉलेज और जानकारी नहीं होती, और इस कारण आपको डर लगता है कि कहीं आप कुछ गलत न कर दें। आपको लोगों से बात करने में झिझक होती है, डर लगता है कि कहीं लोग आपको रिजेक्ट न कर दें।

असफलता का डर भी आपको पीछे खींचता है। और सबसे बड़ी बात – आप कदम उठाना ही नहीं चाहते।

आप उस आरामदायक स्थिति में इतने ज्यादा सेट हो जाते हैं कि आपको वही चलता रहने देना अच्छा लगता है।

आपको रिस्क लेने से डर लगता है, मेहनत से बचते हैं और समझ नहीं आता की नई इंप्रूवमेंट कैसे करें या नई स्किल कैसे सीखें। यही सारी चीज़े आपकी प्रगति को रोकती हैं और आपको कंफर्ट जोन से बाहर निकलने नहीं देती।

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कंफर्ट जोन क्या होता है

कंफर्ट जोन से बाहर कैसे निकले।how to get out of your comfort zone tips

कंफर्ट जोन से बाहर निकलने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप अपना घर-गृहस्थी छोड़ दें या सब कुछ छोड़कर इधर-उधर भटकने लगे। इसका असली मतलब है – अपनी वर्तमान स्थिति में रहते हुए खुद को बेहतर बनाना और अपनी ग्रोथ पर काम करना।

मान लीजिए आप एक जॉब करते हैं। तो कंफर्ट जोन से बाहर निकलना यह नहीं है कि आप जॉब छोड़ दें।

बल्कि इसका मतलब है कि आप जॉब के बाद जो समय आपके पास बचता है, उसका उपयोग आप कैसे करते हैं। क्या आप उसे सिर्फ मनोरंजन, मोबाइल, घूमने-फिरने या आराम में बर्बाद कर देते हैं? या फिर आप उस समय को नई स्किल सीखने, खुद को बेहतर बनाने और अपनी इनकम बढ़ाने के तरीके ढूंढने में लगाते हैं?

अगर आप केवल जॉब कर रहे हैं और उसमें आपकी सेविंग नहीं हो रही है, आप बस एडजस्ट करते जा रहे हैं, तो यह कंफर्ट जोन है। इससे बाहर निकलने के लिए आपको अपने समय का सही उपयोग करना होगा – नई स्किल, नया ज्ञान और नए अवसरों पर काम करना होगा, ताकि आप धीरे-धीरे ग्रोथ जोन की ओर बढ़ सकें।

कंफर्ट जोन से बाहर निकलने के पांच टिप्स-

1. छोटे-छोटे स्टेप्स लें

हर दिन कुछ नया सीखें – जैसे किताब पढ़ना, छोटी-छोटी नई आदत अपनाना, नए लोगों से मिलना या जिम्मेदारी लेना।

पहला कदम हमेशा मुश्किल लगता है, लेकिन वही आपकी जिंदगी का सबसे पावरफुल कदम होता है।

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2. अपनी फील्ड की जानकारी इकट्ठा करना

जिस भी काम में आप आगे बढ़ना चाहते हैं, उसकी जानकारी जुटाना शुरू करें। जब आप अपनी फील्ड से जुड़ी सही नॉलेज हासिल कर लेते हैं, तो आपका कॉन्फिडेंस बढ़ता है और आप उस दिशा में कदम बढ़ाने लगते हैं।

3. डर को मैनेज करना सीखें

आपको असफलता का डर, रिजेक्शन का डर या लोगों से बात करने की झिझक हो सकती है। लेकिन आगे बढ़ने के लिए इन चुनौतियों का सामना करना जरूरी है – हर सफल इंसान इन्हें फेस करके ही ग्रोथ जोन में पहुँचता है।

अगर आप लोगों से बात नहीं कर पातें तो भी बात करना शुरू करें। रिजेक्शन मिले तो यह समझें की क्यों मिला, उसमें सुधार करो और फिर दोबारा प्रयास करें।

असफलताओं से घबराएं नहीं – उन्हें अपना हथियार बनाए और सफलता की तरफ बढ़ते जाएं।

4. कॉन्फिडेंट और अच्छे लोगों को अपना दोस्त बनाएं

अगर आप ग्रोथ जोन में पहुँचना चाहते हैं, तो अपने आसपास ऐसे लोगों को रखें जो उस फील्ड में सफल हो, जिसकी और आप बढ़ना चाहते हैं। उनसे दोस्ती करें, उनकी बातों से सीखें और उनकी गाइडेंस लें।

सही लोग आपको सही दिशा देते हैं, अच्छी सलाह देते हैं और आपके अंदर कॉन्फिडेंस बढ़ाते हैं। ऐसे लोगों की संगत में रहकर आप भी उनकी तरह सोचने और आगे बढ़ने लगेंगे – और धीरे-धीरे कंफर्ट जोन से बाहर निकल पाएंगे।

5. नेगेटिव विजुलाइजेशन करें

जब आप कंफर्ट जोन में रहते हैं, तो एक बार सोचे कि इससे आपको क्या-क्या नुकसान हो रहा हैं। आप अपनी जिंदगी में जो चीज़े पाना चाहते हैं, वह सिर्फ इसलिए नहीं हो पा रही क्योंकि आप अभी भी उसी आरामदायक दायरे में फंसे हुए हैं।

जब आप इन सारे नेगेटिव बातों को सामने लाकर देखते हैं – कि कंफर्ट जोन में रहकर आप क्या-क्या खो रहे हैं – तो आपके अंदर खुद-ब-खुद बदलाव की इच्छा जागती है।

यह डर है कि “मेरे साथ ऐसा ना हो जाए” आपको ग्रोथ जॉन की और धकेलने लगता है और आप आगे बढ़ने की कोशिश करने लगते हैं।

Fear is temporary. Regret lasts forever. min

अपने कम्फर्ट जोन की पहचान कैसे करें।how to identify your comfort zone

अगर आपको चुनौतियाँ लेने से डर लगता है, आप हर काम के लिए बहाना बनाते हैं कि “मेरे पास टाइम नहीं है”, आपको सब कुछ आसान चाहिए होता है, रिस्क लेने से घबराते हैं, बार-बार सोचते हैं कि “लोग मेरे बारे में क्या कहेंगे”, और मेहनत करने से डरते हैं तो समझ लीजिए कि आप कंफर्ट जोन में हैं।

निष्कर्ष

आखिर में, जब आप समझ जाते हैं कि कंफर्ट जोन क्या होता है, तब आपको यह भी महसूस होता है कि इससे बाहर निकलना सिर्फ एक निर्णय की दूरी पर है। इसके लिए सबसे जरूरी है कि आप अपने सपनों को हर दिन याद रखें। लोग क्या कहेंगे, कौन क्या बोलेगा – इन बातों को इग्नोर करके बस अपने लक्ष्य पर फोकस रखें। जब आपके सपने आपको भीतर से पुकारते हैं, तो आप खुद-ब-खुद में रुकना बंद कर देते हैं। याद रखिए, आपके सपने जितने मजबूत होंगे, उतनी ही आसानी से आप अपने कंफर्ट जोन की सीमाएँ तोड़कर आगे बढ़ पाएंगे।

FAQ-

प्रश्न 1. लोगों से बात करने में डर क्यों लगता है?

उत्तर. लोगों से बात करने में आपको इसलिए डर लगता है क्योंकि या तो आपमें आत्मविश्वास की कमी है या आप सोचते हैं कि लोग मुझे जज करेंगे।

प्रश्न 2. अपने कंफर्ट जोन में रहने के क्या नुकसान है?

उत्तर. अपने कंफर्ट जोन में रहने से आप की ग्रोथ रुक जाएगी, आप आगे नहीं बढ़ पाएंगे और आप जहाँ है वहीं रह जाएंगे।

प्रश्न 3. कितने प्रतिशत लोग अपने कंफर्ट जोन में रहते हैं?

उत्तर. 90% लोग अपने कंफर्ट जोन में रहते हैं।

प्रश्न 4. कम्फर्ट जोन अच्छा है या बुरा?

उत्तर. अगर अभी तक आपकी ग्रोथ नहीं हुई है, तो कंफर्ट जोन आपके लिए बिल्कुल भी सही नहीं है कंफर्ट जोन में रहना आपके लिए बहुत ही बुरा है।

हमें विश्वास है कि, इस आर्टिकल के माध्यम से आपको समझ आया होगा कि कंफर्ट जोन क्या होता है और कंफर्ट जोन से बाहर कैसे निकले।

 

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